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Fact Check: क्या देश में फिर मंडरा रहे नोटबंदी के बादल? जानें RBI के रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ के डिविडेंड और कैश संकट का पूरा सच

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Fact Check: क्या देश में फिर मंडरा रहे नोटबंदी के बादल? जानें RBI के रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ के डिविडेंड और कैश संकट का पूरा सच।

नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: पिछले कुछ दिनों से बाजार के गलियारों और सोशल मीडिया पर “नोटबंदी के बादल” फिर से छाने की खबरें और अफवाहें तेजी से वायरल हो रही हैं। सूत्रों और चर्चाओं के हवाले से दावा किया जा रहा है कि देश में लिक्विडिटी यानी नगदी (कैश) का संकट गहरा गया है, जिससे बाजार में एक बार फिर नोटबंदी की आशंका का माहौल बनने लगा है।

​इन चर्चाओं को हवा तब और मिल गई जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड (लाभांश) जारी करने का एलान किया। लेकिन क्या वाकई देश में नोटबंदी होने वाली है? आइए जानते हैं इस पूरी खबर का असली वित्तीय सच।

​ क्या होता है RBI का डिविडेंड और क्यों जारी हुआ?

​भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सेंट्रल बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2,86,588 करोड़ (लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये) का ऐतिहासिक सरप्लस डिविडेंड ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है। यह पिछले साल के ₹2.69 लाख करोड़ से करीब 6.7% अधिक है।

डिविडेंड जारी क्यों किया जाता है?

दरअसल, आरबीआई विदेशी मुद्रा के प्रबंधन, सरकारी बॉन्डों की खरीद-बिक्री और बैंकों को दिए जाने वाले लोन से जो मुनाफा कमाता है, उसमें से अपनी आकस्मिक जरूरतों (Contingent Risk Buffer) का हिस्सा बचाकर बाकी बची रकम को ‘लाभांश या डिविडेंड’ के रूप में देश के खजाने (सरकार) को सौंप देता है।

​ क्या डिविडेंड देने का मतलब ‘नोटबंदी’ या ‘कैश संकट’ है?

​वित्तीय विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस कदम का नोटबंदी या बाजार में कैश की कमी से कोई सीधा संबंध नहीं है। 1. नोटबंदी की आशंका महज अफवाह: सरकार या आरबीआई की ओर से बड़े नोटों को बंद करने का कोई प्रस्ताव या संकेत नहीं है। बाजार में डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने के कारण कैश का रोटेशन बदला है, जिसे ‘कैश संकट’ कहना गलत होगा।

2. अंतरराष्ट्रीय संकट से निपटने में मिलेगी मदद: वर्तमान में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के कारण देश के आयात बिल बढ़ रहे हैं। आरबीआई का यह रिकॉर्ड डिविडेंड सरकार को वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) नियंत्रित करने और जनकल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए अतिरिक्त ताकत देगा।

3. बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी: आरबीआई समय-समय पर बैंकों में नगदी के प्रवाह को संतुलित करने के लिए VRR (वेरिएबल रेट रेपो) जैसे आर्थिक टूल का इस्तेमाल करता रहता है, जो कि एक सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया है।

​ अफवाहों से बचें

​बाजार में फैली ‘नोटबंदी’ की खबरें पूरी तरह से कयासों और अफवाहों पर आधारित हैं। आरबीआई द्वारा सरकार को दिया गया रिकॉर्ड लाभांश देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और केंद्रीय बैंक की बंपर कमाई का प्रतीक है, न कि किसी वित्तीय आपातकाल या नोटबंदी का संकेत। उपभोक्ता और व्यापारी बिना किसी डर के अपना सामान्य कामकाज जारी रख सकते हैं।

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