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दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से भड़का आक्रोश, जानिए कौन हैं बीजेपी के नए दांव आशुतोष तिवारी जिन्हें मिली कमान

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दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से भड़का आक्रोश, जानिए कौन हैं बीजेपी के नए दांव आशुतोष तिवारी जिन्हें मिली कमान

दतिया: मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को वोटिंग होनी है। लेकिन मतदान से पहले ही यहां का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। बीजेपी द्वारा प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और क्षेत्र के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के भीतर ही बगावत और भारी बवाल शुरू हो गया है।

नाराज नरोत्तम समर्थकों के उग्र प्रदर्शन, चक्का जाम और पथराव के बाद इलाके में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और सख्त रुख अपनाना पड़ा। इस भारी विरोध के बीच हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिर नरोत्तम मिश्रा के गढ़ में बीजेपी ने आशुतोष तिवारी पर दांव क्यों लगाया?

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कौन हैं आशुतोष तिवारी? (प्रत्याशी का प्रोफाइल)

बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी पार्टी के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। वे संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और उनकी पहचान एक संघर्षशील व जमीनी नेता की है:

नरोत्तम मिश्रा के ‘गढ़’ में आखिर क्यों चुना गया आशुतोष को?

दतिया सीट को पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का मजबूत किला माना जाता है, जहां से वे कई बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनके समर्थकों की नाराजगी की मुख्य वजह भी यही है। इसके बावजूद बीजेपी आलाकमान द्वारा रणनीति बदलने के पीछे कई अहम कारण माने जा रहे हैं:

  1. निष्ठा और अनुभव को प्राथमिकता: बीजेपी नेतृत्व ने उम्मीदवार तय करने से पहले संगठन के प्रति नेता के अनुभव और उसकी अटूट निष्ठा को सर्वोपरि रखा, जिसमें आशुतोष खरे उतरे।

  2. मजबूत जमीनी पकड़: भाजपा की यह पुरानी रणनीति रही है कि वह बड़े चेहरों के बजाय जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ताओं को तरजीह देती है। आशुतोष की आम जनता के बीच सीधी पैठ है।

  3. स्थानीय और जातीय समीकरण: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार पार्टी ने दतिया के बदलते स्थानीय और जातीय समीकरणों को भांपते हुए अपनी सोशल इंजीनियरिंग के तहत यह बड़ा बदलाव किया है।दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से भड़का आक्रोश, जानिए कौन हैं बीजेपी के नए दांव आशुतोष तिवारी जिन्हें मिली कमान

नतीजों पर टिकीं सबकी नजरें

टिकट वितरण को लेकर दतिया की सड़कों पर उतरा नरोत्तम समर्थकों का गुस्सा यह साफ बयां कर रहा है कि आशुतोष तिवारी के लिए यह राह आसान नहीं होने वाली है। अब देखना यह होगा कि आंतरिक कलह से जूझ रही बीजेपी इस सीट को दोबारा जीत पाती है या नहीं, और क्या आशुतोष तिवारी शीर्ष नेतृत्व के इस बड़े भरोसे पर खरे उतर पाते हैं। इसका फैसला 30 जुलाई को होने वाले मतदान के बाद नतीजों के साथ साफ हो जाएगा।

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