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दतिया उपचुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका: पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की अर्जी दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज; नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

दतिया में इतिहास का पहला उपचुनाव: ढाई साल में ही दोबारा वोट डालेंगे 2.20 लाख मतदाता

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दतिया उपचुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका: पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की अर्जी दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज; नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

नई दिल्ली / भोपाल: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को बहुत बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती (Rajendra Bharti) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने बैंक धोखाधड़ी मामले में मिली अपनी 3 साल की सजा (दोषसिद्धि) पर रोक लगाने की मांग की थी।

जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने राजेंद्र भारती की इस अर्जी को नामंजूर कर दिया। इस फैसले के बाद अब राजेंद्र भारती की दोषसिद्धि (Conviction) बरकरार रहेगी, जिसका सीधा असर उनके राजनीतिक भविष्य और आगामी दतिया उपचुनाव पर पड़ेगा।

क्यों हुआ दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला?

राजेंद्र भारती ने अदालत से अपील की थी कि जब तक मामले में उनकी मुख्य आपराधिक अपील पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक उनकी सजा (दोषसिद्धि) पर अंतरिम रोक लगा दी जाए। उनके वकीलों का तर्क था कि अगर सजा पर रोक लग जाती है, तो विधानसभा से उनकी अयोग्यता का आधार खत्म हो जाएगा और वे चुनाव लड़ सकेंगे।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, इससे पहले कोर्ट ने उनकी 3 साल की जेल की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित (Suspend) कर रखा है, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक न मिलने के कारण वे तकनीकी रूप से चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य बने रहेंगे।

क्या है पूरा मामला (27 साल पुराना FD घोटाला)?

यह पूरा विवाद साल 1998 का है, जब राजेंद्र भारती दतिया के जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे।

दतिया की सियासत पर क्या होगा असर?

उपचुनाव की रेस से बाहर: चुनाव आयोग ने दतिया सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर रखी है। राजेंद्र भारती को उम्मीद थी कि हाईकोर्ट से राहत मिलने पर वे खुद दोबारा मैदान में उतरेंगे। लेकिन अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद वे खुद उपचुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

राजेंद्र भारती ने साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तमी मिश्रा को हराकर यह सीट जीती थी। अब इस बड़े झटके के बाद कांग्रेस को दतिया उपचुनाव के लिए किसी नए चेहरे पर दांव लगाना होगा, जबकि बीजेपी इस कानूनी फैसले को लेकर फ्रंट फुट पर आ गई है।

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