मप्र: अतिथि विद्वानों के हित में सरकार उठाएगी बड़े कदम, मांगों के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति; 2029 तक प्रदेश को नशामुक्त बनाने का संकल्प
मप्र: अतिथि विद्वानों के हित में सरकार उठाएगी बड़े कदम, मांगों के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति; 2029 तक प्रदेश को नशामुक्त बनाने का संकल्प

मप्र: अतिथि विद्वानों के हित में सरकार उठाएगी बड़े कदम, मांगों के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति; 2029 तक प्रदेश को नशामुक्त बनाने का संकल्प
कटनी/भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वान हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य संवारने वाले पावन मंदिर के पुजारी हैं। अतिथि विद्वानों के परिश्रम का सम्मान करते हुए राज्य सरकार उनके हित में लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उनकी सभी मांगों पर विचार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जिसकी अनुशंसाएं आते ही आवश्यक संभव कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर प्रदेशभर से आए अतिथि विद्वानों द्वारा मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन किया गया।
देश का सबसे बेहतर मॉडल मध्यप्रदेश में होगा लागू
मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि अतिथि विद्वान हमारे परिवार के सदस्य हैं और सरकार उनके कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अतिथि विद्वानों के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति देश के दूसरे राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रही है, जिसके आधार पर मध्यप्रदेश में सबसे बेहतर मॉडल वाली व्यवस्था लागू की जाएगी।
अतिथि विद्वानों के हित में सरकार द्वारा लिए गए 5 बड़े फैसले
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि विद्वानों के लिए किए गए प्रमुख कार्यों को रेखांकित किया:
- भर्ती में 25% आरक्षण: मप्र लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में अतिथि विद्वानों के लिए 25 प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं।
- आयु सीमा में छूट: शासकीय सेवा में आने के लिए अतिथि विद्वानों को आयु सीमा में 10 वर्ष की छूट दी गई है।
- नियमितीकरण में सफलता: इस व्यवस्था के चलते वर्ष 2022 में 117 और वर्ष 2024 में 48 अतिथि विद्वान सहायक प्राध्यापक के नियमित पद पर नियुक्ति प्राप्त कर चुके हैं।
- अवकाश की सुविधा: सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए 13 आकस्मिक (CL) और 3 ऐच्छिक अवकाश के साथ-साथ महिला अतिथि विद्वानों के लिए प्रसूति अवकाश भी सुनिश्चित किया है।
- ट्रांसफर और फॉल-आउट में राहत: साल में एक बार घर के पास कॉलेज चुनने की सुविधा दी गई है। साथ ही फॉल-आउट होने की स्थिति में हर महीने दो अवसर देकर दोबारा काम पर रखने की व्यवस्था की गई है।
राष्ट्रीय औसत से बेहतर हुई प्रदेश की सकल पंजीयन दर (GER)
डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश की सकल पंजीयन दर (Gross Enrolment Ratio) राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर हो गई है। वहीं, स्कूल शिक्षा में राज्य की ड्रॉप आउट दर घटकर शून्य पर आ गई है। प्रदेश के हर जिले में एक-एक ‘पीएमश्री एक्सीलेंस कॉलेज’ खोले गए हैं तथा खरगौन, गुना और सागर में नए शासकीय विश्वविद्यालयों की शुरुआत की गई है।
2029 तक नशामुक्त बनेगा मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने इस मंच से एक और बड़ा सामाजिक संकल्प लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश इस वर्ष नक्सलवाद जैसी समस्या से पूरी तरह मुक्त हो गया है। अब हमारी अगली लड़ाई नशाखोरी के खिलाफ है। केंद्रीय गृहमंत्री के वर्ष 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ के संकल्प को पूरा करने में मध्यप्रदेश अपनी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद सभी विद्वानों और युवाओं से प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की।
विशेष उपस्थिति: कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक डॉ. अशोक कड़ेल, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्री मनीष सिंह सहित भारतीय मजदूर संघ और राज्य अतिथि विद्वान संघ के पदाधिकारी व भारी संख्या में प्राध्यापक उपस्थित थे।








