कैंसर मरीजों पर दोहरी मार: सबसे सस्ती कीमोथेरेपी दवा ‘सिसप्लेटिन’ की भारी किल्लत, महंगे विकल्प ‘कार्बोप्लेटिन’ के दाम भी 48% बढ़े
कैंसर मरीजों पर दोहरी मार: सबसे सस्ती कीमोथेरेपी दवा 'सिसप्लेटिन' की भारी किल्लत, महंगे विकल्प 'कार्बोप्लेटिन' के दाम भी 48% बढ़े
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कैंसर मरीजों पर दोहरी मार: सबसे सस्ती कीमोथेरेपी दवा ‘सिसप्लेटिन’ की भारी किल्लत, महंगे विकल्प ‘कार्बोप्लेटिन’ के दाम भी 48% बढ़े
भोपाल: मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली और सबसे किफायती कीमोथेरेपी दवा ‘सिसप्लेटिन’ (Cisplatin) की बाजार में भारी शॉर्टेज हो गई है। इस किल्लत के कारण अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर आर्थिक बोझ अचानक काफी ज्यादा बढ़ गया है।
सस्ता इलाज हुआ बेअसर, महंगे विकल्प पर मजबूर हुए डॉक्टर
बाजार में सिसप्लेटिन दवा की अनुपलब्धता के कारण डॉक्टरों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मजबूरी का सौदा: मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को मजबूरी में सिसप्लेटिन की जगह इसका दूसरा महंगा विकल्प ‘कार्बोप्लेटिन’ (Carboplatin) इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
दामों में भारी उछाल: मांग में अचानक आई तेजी के कारण बाजार में कार्बोप्लेटिन की कीमतों में भी 48 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
क्यों हुआ यह संकट? कच्चे माल (API) की कीमतों में लगी आग
दवा उद्योग (फार्मा सेक्टर) से जुड़े जानकारों और विशेषज्ञों ने इस संकट के पीछे की मुख्य वजह का खुलासा किया है:
लागत में रिकॉर्ड तेजी: इस दवा को तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API/कच्चा माल) की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी आई है।
दोगुने से ज्यादा हुए दाम: वर्ष 2025 के अंत तक सिसप्लेटिन का कच्चा माल करीब 3,900 रुपये प्रति ग्राम की दर पर मिल रहा था। लेकिन फरवरी 2026 तक आते-आते इसकी कीमत में भारी उछाल आया और यह लगभग 8,000 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गया।
थम गया उत्पादन: कच्चे माल की कीमत दोगुनी से अधिक हो जाने के कारण दवा कंपनियों के लिए इसका उत्पादन घाटे का सौदा साबित हो रहा है, जिससे इसकी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।