बहस कीजिए, उपहास मत उड़ाइए: प्रियंका गांधी के ‘गौमूत्र विशेषज्ञ’ वाले बयान पर भड़के 215 से अधिक शिक्षाविद; लिखा ओपन लेटर
नई दिल्ली: आईआईटी (IIT) और आईआईएम (IIM) के निदेशकों, कुलपतियों और प्रमुख वैज्ञानिकों समेत देश के 215 से ज्यादा दिग्गजों व शिक्षाविदों ने कांग्रेस सांसद और नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को एक खुला पत्र (Open Letter) लिखा है। यह पत्र संसद (लोकसभा) में प्रियंका गांधी द्वारा आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र विशेषज्ञ’ कहे जाने के विरोध में लिखा गया है।
शिक्षाविदों ने पत्र में गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी भी वैज्ञानिक या विद्वान के विचारों पर स्वस्थ बहस की जगह उनका उपहास उड़ाना और अपमानजनक ठप्पा लगाना हमारे संवैधानिक ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ (Scientific Temper) को कमजोर करता है।
प्रियंका गांधी ने लोकसभा में क्या कहा था?
NEET और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित 6-सदस्यीय टास्क फोर्स पर सवाल उठाते हुए प्रियंका गांधी ने लोकसभा में कहा था:
“प्रधानमंत्री को समझना होगा कि सिर्फ नई समितियां बनाने से काम नहीं चलेगा। राधाकृष्णन समिति की एक भी सिफारिश लागू नहीं हुई। अब नई समिति में पूर्व IB प्रमुख, IT कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र विशेषज्ञ’ को शामिल कर दिया गया है।”
शिक्षाविदों के पत्र के मुख्य बिंदु
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उपहास की जगह तर्क और साक्ष्य हों: पत्र में कहा गया कि चाहे यह टिप्पणी व्यंग्य हो या राजनीतिक बयानबाजी, भारत के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान के प्रमुख के प्रति ऐसी भाषा चिंताजनक है। उनके तर्कों की आलोचना की जा सकती है, साक्ष्य मांगे जा सकते हैं, लेकिन अकादमिक परंपरा का उपहास नहीं उड़ाया जाना चाहिए।
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वैज्ञानिक सोच की सही परिभाषा: शिक्षाविदों ने लिखा कि वैज्ञानिक सोच का मतलब सिर्फ अनोखे विचारों पर शक करना नहीं, बल्कि बिना किसी पक्षपात के हर विचार की जांच करने का साहस रखना है। इतिहास में कई विचार जिन्हें पहले अविश्वसनीय माना गया था, वे बाद में साबित हुए।
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शोधकर्ताओं पर असर: पत्र में चिंता जताई गई कि ऐसी राजनीतिक टिप्पणियों से भारत के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों में यह डर बैठेगा कि सार्वजनिक विमर्श में हिस्सा लेने पर उन्हें अपमानजनक ठप्पों का सामना करना पड़ सकता है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली प्रमुख हस्तियां
इस ओपन लेटर पर देश के प्रमुख संस्थानों के दिग्गजों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- प्रो. सचिन चतुर्वेदी: कुलपति, नालंदा विश्वविद्यालय
- राजीव कुमार: पूर्व अध्यक्ष, नीति आयोग
- गणेशन कन्नाबिरन: निदेशक, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC)
- डी. पी. अग्रवाल: पूर्व अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- अनिल सहस्रबुद्धे: पूर्व अध्यक्ष, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE)
क्या था पूरा विवाद और ‘संन्यासी की कहानी’?
प्रोफेसर वी. कामकोटि जनवरी 2025 में चेन्नई की एक गौशाला में पोंगल समारोह के दौरान अपने भाषण को लेकर चर्चा में आए थे। वहां उन्होंने एक संन्यासी की कहानी का जिक्र करते हुए कहा था कि गौमूत्र के सेवन से उनका तेज बुखार ठीक हुआ था। इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उनकी आलोचना हुई थी। हालांकि, पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रो. कामकोटि की शैक्षणिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों को देखते हुए शिक्षाविदों ने उनके पक्ष में स्टैंड लिया है। बहस कीजिए, उपहास मत उड़ाइए: प्रियंका गांधी के ‘गौमूत्र विशेषज्ञ’ वाले बयान पर भड़के 215 से अधिक शिक्षाविद; लिखा ओपन लेटर
