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Brand Government School: अब प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे सरकारी ‘मास्टर’; ग्वालियर-चंबल की सड़कों पर CM राइज स्कूलों की भारी ब्रांडिंग, बदल रही शिक्षा की तस्वीर

Brand Government School: अब प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे सरकारी 'मास्टर'; ग्वालियर-चंबल की सड़कों पर CM राइज स्कूलों की भारी ब्रांडिंग, बदल रही शिक्षा की तस्वीर

Brand Government School: अब प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे सरकारी 'मास्टर'; ग्वालियर-चंबल की सड़कों पर CM राइज स्कूलों की भारी ब्रांडिंग, बदल रही शिक्षा की तस्वीर

Brand Government School: अब प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे सरकारी ‘मास्टर’; ग्वालियर-चंबल की सड़कों पर CM राइज स्कूलों की भारी ब्रांडिंग, बदल रही शिक्षा की तस्वीर। बेहतर शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य” – यह स्लोगन अब केवल ऊँची फीस वाले निजी स्कूलों की बपौती नहीं रहा। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार अब शिक्षा के क्षेत्र में ‘कॉरपोरेट स्टाइल’ में उतर आई है। ग्वालियर और चंबल संभाग के प्रमुख चौराहों से लेकर मुख्य मार्गों तक, सरकारी स्कूलों (CM राइज – सांदीपनि) के बड़े-बड़े और आकर्षक होर्डिंग्स इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं।

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Brand Government School: अब प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे सरकारी ‘मास्टर’; ग्वालियर-चंबल की सड़कों पर CM राइज स्कूलों की भारी ब्रांडिंग, बदल रही शिक्षा की तस्वीर

निजी स्कूलों की तर्ज पर ‘ब्रांडिंग’

प्रदेश सरकार ने सीएम राइज स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के विकल्प के रूप में खड़ा करने के लिए मार्केटिंग का सहारा लिया है।

विज्ञापन बनाम धरातल: असली चुनौती

सड़कों पर लगे यह होर्डिंग्स इस बात का संकेत हैं कि सरकारी शिक्षक और सरकार, दोनों ही अब निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा (Competition) के लिए तैयार हैं। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि:

  1. गुणवत्ता का सवाल: विज्ञापनों की तरह ही यदि धरातल पर भी शिक्षा की गुणवत्ता निजी स्कूलों के बराबर रही, तभी यह कॉम्पिटिशन सफल होगा।

  2. भरोसा जीतना: सालों से सरकारी शिक्षा के प्रति जो नकारात्मक धारणा रही है, उसे बदलने के लिए केवल होर्डिंग्स नहीं, बल्कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की निरंतरता जरूरी है।

बदलाव का संकेत

ग्वालियर की सड़कों पर सरकारी स्कूलों की यह ब्रांडिंग एक ‘साइकोलॉजिकल’ बदलाव ला रही है। अब मध्यमवर्गीय परिवार भी इन स्कूलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह कदम बताता है कि शिक्षा अब केवल एक सेवा नहीं, बल्कि गुणवत्ता और आकर्षण का केंद्र भी बनने जा रही है।

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