MP में गिद्धों के संरक्षण की बड़ी कामयाबी: ऑनलाइन गणना में मिले 10,742 गिद्ध, पिछले साल से 1200 बढ़े।
- डिजिटल हुई प्रदेश व्यापी ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना 2026-27, पहली बार ऐप के जरिए तुरंत आए आंकड़े
- मध्य प्रदेश के जंगलों में चहक रहे 9394 वयस्क और 1348 किशोर गिद्ध
- उड़ते हुए नहीं, सिर्फ घोंसलों और विश्राम स्थलों पर बैठे गिद्धों की ही हुई गिनती
कटनी (24 मई): मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आई है। प्रदेश व्यापी ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना 2026-27 के आंकड़े जारी हो गए हैं, जिसके अनुसार राज्य में गिद्धों की आबादी में शानदार इजाफा हुआ है। इस बार की गणना में कुल 10,000 742 गिद्ध पाए गए हैं, जो पिछले साल की संख्या (9,509) से लगभग 1,200 अधिक हैं। यह बढ़ोतरी राज्य में पर्यावरण और वन्यजीवों के बेहतर होते संरक्षण को दर्शाती है।
पहली बार ‘ऑनलाइन ऐप’ से लाइव ट्रैकिंग
इस साल की ग्रीष्मकालीन गणना पूरी तरह हाईटेक रही। 22 मई से 24 मई 2026 तक रोजाना सूर्योदय से सुबह 9 बजे तक चली इस गणना के लिए वन विभाग ने एक खास ‘ऑनलाइन ऐप’ तैयार किया था। ऐप के इस्तेमाल से डेटा का संकलन तुरंत हो गया और रिपोर्ट लाइव प्राप्त हुई, जिससे वन विभाग की कार्यक्षमता में बड़ा सुधार देखा गया। इस प्रक्रिया के लिए मास्टर ट्रेनर्स और अशासकीय संस्थाओं को पहले ही ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई थी।
16 वृत्त और 9 टाइगर रिजर्व में हुआ सर्वे
यह महा-सर्वेक्षण प्रदेश के सभी 16 वन वृत्तों, 9 टाइगर रिजर्व, वन विकास निगम के क्षेत्रों और अन्य सुरक्षित जंगलों में एक साथ चलाया गया। कुल 10,742 गिद्धों में से 9,394 वयस्क (Adult) और 1,348 किशोर (Juvenile/आधे उम्र के) गिद्ध दर्ज किए गए हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में इस गणना की शुरुआत साल 2016 में हुई थी, तब राज्य में सिर्फ 7,028 गिद्ध ही मिले थे।
इंटेलिजेंस टीम: उड़ते हुए गिद्धों को नहीं गिना गया
सटीकता बनाए रखने के लिए गणना का एक कड़ा नियम था—केवल अपने घोंसलों या विश्राम स्थलों पर बैठे हुए गिद्धों और उनके नवजातों को ही गिना गया, हवा में उड़ते हुए गिद्धों को इसमें शामिल नहीं किया गया। इस अभियान में वन विभाग की टीम के साथ-साथ देश-प्रदेश के पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, छात्र और स्थानीय नागरिक भी स्वयंसेवक के रूप में सुबह-सुबह घोंसलों के पास पहुंचे। पूरे डेटा को संकलित करने के लिए राजधानी भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में मुख्य कंट्रोल रूम बनाया गया है।

