Bharat Update 2024: घटनाओं को एक सूत्र में पिरोते हुए इस युगांतरकारी साल पर एक नजर…

Bharat Update 2024: घटनाओं को एक सूत्र में पिरोते हुए इस युगांतरकारी साल पर एक नजर जो पूरे साल को एक साथ बताएगी। बीता साल कई मोर्चों पर भारत का साबित हुआ। इस वर्ष की कई घटनाओं, विकास, आर्थिक प्रगति और नई शुरुआतों ने नया रूप लेते भारत को पारिभाषित किया। अंतरिक्ष, अर्थव्यवस्था, राजनीति, मनोरंजन और खेलों से लेकर हमारी जीवन शैली तक ने नई विशिष्टताएं और कई उपलब्धियां हासिल कीं। हमारे ये अर्जन स्थायी हैं और व्यापक बदलाव लाने वाले हैं।

ऐसे ही 23 खास मौकों, चलन और घटनाओं को एक सूत्र में पिरोते हुए इस युगांतरकारी साल पर एक नजर…

चंद्रयान-3: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सबसे पहले हम

भारत ने 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग करवाई, हम ऐसा करने वाले दुनिया के पहले देश बने। मिशन ने चंद्रमा पर सल्फर, मैग्नीशियम, सिलिकॉन और ऑक्सीजन के अणुओं की मौजूदगी, एल्युमीनियम, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम, टाइटेनियम की उपस्थिति साबित की। चंद्र सतह और सतह से नीचे के तापमान में 70 डिग्री सेल्सियस के अंतर को बताया और वातावरण में प्लाज्मा व चंद्र भूकंप को भी दर्ज किया।

उद्देश्य: पृथ्वी के बाहर किसी उपग्रह पर अपना मिशन सफलता से उतारने की हमारी क्षमता साबित हुई। 2019 में चंद्रयान-2 की विफलता को महज 4 साल में हमने शानदार उपलब्धि में तब्दील कर दिया। बताया कि नया भारत जब विफल होता है, उतनी ही तेजी से जीत के लिए वापसी भी करता है।

पीएसएलवी सी-55: 50 उपग्रह प्रक्षेपण में अर्ध शतक

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस साल 50 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे। रॉकेट पीएसएलवी सी-55 के जरिये 22 अप्रैल को टेलियोज-2 और लूमेलाइट-4 उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचाए। इसी रॉकेट के सी-56 वर्जन ने 30 जुलाई को डीएस सार व 6 अन्य उपग्रह प्रक्षेपित किए।

बाहुबली रॉकेट जीएसएलवी ने 29 मई को 2,232 किलो वजनी उपग्रह एफ12/एनवीएस-01 प्रक्षेपित किया। छोटे रॉकेट एसएसएलवी-डी2 ने 10 फरवरी को ईओएस 07 व दो अन्य उपग्रह प्रक्षेपित किए। रॉकेट एलवीएम 3 एम3 ने 26 मार्च को वनवेब इंडिया-2 मिशन के तहत 5,805 किलो वजनी 36 उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचाए।

फायदा: कई तकनीकी कामों के लिए अंतरिक्ष में अपने उपग्रह भेजने के मामले में भारत जैसी कुशलता और क्षमता हर देश के पास नहीं है। यह विदेशी मुद्रा में कमाई का अहम जरिया साबित हो सकता है।

विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण से 2020 में इसरो को 321 करोड़ रुपये की आय हुई थी, तो 2022 में 1,731 करोड़ रुपये। वहीं, 2023 में इसरो की व्यावसायिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लि ने करीब 2,700 करोड़ रुपये कमाए। आने वाले समय में इस आय के बेहद तेजी से बढ़ने के अनुमान हैं।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्रमा पर सुनहरे कदम का रोडमैप

अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय को उतारने के लक्ष्य तय किए। इस रणनीतिक रोडमैप में बताया कि गगनयान 2025 में पहली बार किसी भारतीय को अंतरिक्ष में भेजेगा। नई पीढ़ी का प्रक्षेपण व्हीकल (एनजीएलवी) यानी नया रॉकेट भी विकसित करेंगे।

फायदा: ये मिशन अंतरिक्ष में हमारी मौजूदगी को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में हमारे शोध पूरी दुनिया के लिए मददगार होंगे और हमें अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में पहचान पुख्ता करने में मदद मिलेगी।

आदित्य एल1: सूर्य को जानने निकले

सूर्य के अध्ययन के लिए हमने 2 सितंबर को अपना पहला मिशन आदित्य एल1 भेजा। यह 15 लाख किमी का सफर तय कर नए साल के शुरुआती 10 दिन में लग्रांजियन बिंदु 1 यानी एल1 पर पहुंचेगा। इस 1,500 किलो वजनी उपग्रह में 7 उपकरण हैं। इनमें से 3 कई तरह के वैज्ञानिक परीक्षण भी करेंगे।

उद्देश्य: मिशन सूर्य क्रोमोस्फीयर व कोरोना का अध्ययन करेगा। नतीजे में सूरज से निकलने वाले सौर-तूफानों, रेडियोधर्मिता व चुंबकीय क्षेत्र से जुड़े अध्ययन और सौर हलचलों के पूर्वानुमानों में मदद मिलेगी। इससे भारत समेत कई देशों के सैटेलाइट को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी। यह मिशन पांच साल तक सूर्य की भीतरी सतह के मुकाबले बाहरी सतह का तापमान कई गुना अधिक होने जैसे कई रहस्यों को सुलझाने में भी मदद देगा।

गगनयान मिशन के लिए सफल परीक्षण

2025 में 3 भारतीयों को अपने बलबूते अंतरिक्ष में भेजने के लिए इसरो के मिशन गगनयान के इस साल दो अहम और सफल परीक्षण हुए। 21 अक्तूबर को परीक्षण यान अबॉर्ट मिशन (टीवी-डी1) हुआ। दूसरे परीक्षण में यान के क्रू-मॉड्यूल (जहां अंतरिक्ष यात्री बैठेंगे) को बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित ढंग से गिराने की प्रक्रिया जांची गई।

फायदा: टीवी-डी1 परीक्षण गगनयान में गड़बड़ी आने पर अंतरिक्ष यात्रियों का जीवन बचाएगा। क्रू-मॉड्यूल को रॉकेट से 2.5 किमी ऊंचाई पर ले जा सकेगा और लॉन्च पैड से 400 मीटर दूर उतार सकेगा। सुरक्षा और पुख्ता करने के लिए टीवी-डी2, डी3 और डी4 परीक्षण बाकी हैं।

रियूजेबल रॉकेट की ओर बढ़ाए कदम

किफायती अंतरिक्ष मिशन बनाने के लिए विख्यात इसरो ने खर्च में और कमी लाने के लिए पुन: उपयोग होने वाली (रियूजेबल) रॉकेट प्रणाली के परीक्षण शुरू किए। इस ‘रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल ऑटोनॉमस लैंडिंग मिशन’ (आरएलवी एलईएक्स) को परखने के लिए 4.6 किमी ऊंचाई पर ले जाकर उतरने के लिए छोड़ दिया गया। स्वचालित (ऑटोनॉमस) प्रणाली के जरिये यह कर्नाटक के चित्रदुर्ग में वायु पट्टी पर सुरक्षित उतरा। इस तरह पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करने के बाद अंतरिक्ष यान की सतह पर ऑटोनॉमस लैंडिंग की क्षमता भी हमने हासिल की।

फायदा: दुनिया में पहली बार किसी डैने-युक्त अंतरिक्ष यान को 4.6 किमी ऊंचाई से गिराकर रनवे पर स्वचालित (ऑटोनॉमस) लैंडिंग करवाई गई। इसरो का लक्ष्य ऐसे यान विकसित करना है, जो अंतरिक्ष में मिशन को अंजाम देने के बाद सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे, फिर से उपयोग हो सके। यह नए मिशन पर खर्च कम करेगा, समय भी बचाएगा।

सेहत : डायबिटीज के खिलाफ जंग का एलान

देश ने डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मरीजों की स्क्रीनिंग की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की। डब्ल्यूएचओ ने इसे सराहते हुए बताया कि भारत करीब 7.5 करोड़ लोगों को मानक इलाज मुहैया करवाने पर जोर देगा। इसके लिए वर्ष 2025 तक का लक्ष्य बनाया गया है। डब्ल्यूएचओ की वैश्विक टीबी रिपोर्ट ने भी इस बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या और मामलों का अनुपात घटाने के लिए भारत को सराहा।

फायदा: गैर संक्रामक रोगों से लोगों को बचाने में मदद मिलेगी। खासतौर पर साइलेंट किलर डायबिटीज को नियंत्रित करने पर काम हो सकेगा। बड़ी आबादी की स्क्रीनिंग से कई अन्य बीमारियों का डाटा हासिल होगा।

स्वास्थ्य बीमा में नए रिकॉर्ड बने

इस साल देश में स्वास्थ्य बीमा का कुल मूल्य 37,200 करोड़ डॉलर पहुंच गया। इस वृद्धि में सरकारी और निजी क्षेत्र ने अहम योगदान दिया। सरकार का आयुष्मान भारत के जरिये आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को चिकित्सा खर्च में राहत देने का काम जारी रहा। देश के बजट में से स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च 2019 के मुकाबले 33 प्रतिशत बढ़ चुका है।

फायदा: आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए सरकार फंडिंग बढ़ा रही है, जिसे प्रभावशाली कदम माना जा रहा है। हालांकि अब भी जीडीपी का 2.1 प्रतिशत ही इस क्षेत्र पर खर्च हो रहा है। इसे बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है, खासतौर पर कोविड महामारी के बाद।

देश को मिला लोकतंत्र का नया मंदिर

नया संसद भवन 28 मई को देश को समर्पित हुआ। 19 सितंबर से पहला संसदीय सत्र शुरू हुआ। 96 साल पुराने संसद भवन के ढांचे के स्थायित्व को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं। सदस्यों व स्टाफ के लिए जगह की भी कमी महसूस हो रही थी। 2010 में बनी समिति ने नए भवन का सुझाव दिया। 2019 में काम शुरू हुआ और कर्तव्य पथ के साथ पूरा किया गया।

फायदा: विदिशा के विजय मंदिर से मिलते-जुलते डिजाइन वाला नया संसद भवन 150 साल तक शान से खड़ा रहेगा। इसमें भूकंप से बचाव की क्षमता है। यहां लोकसभा व राज्यसभा के ज्यादा सदस्यों व स्टाफ को समायोजित किया जा सकता है। 2026 में प्रस्तावित परिसीमन के बाद लोकसभा में 543 की जगह 753 सांसद हो जाएंगे। नए भवन में लोकसभा के 888 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है।

जी-20 से दिखी वैश्विक नेतृत्व की क्षमता

भारत ने पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली 20 देशों की नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन में मेजबानी की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफल मेजबानी करके हमने अपनी वैश्विक नेतृत्व की क्षमता भी दिखाई। अफ्रीकी संघ की जी-20 में स्थायी सदस्यता सुनिश्चित की। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत से सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन, इस्राइल होते हुए यूरोपीय संघ तक आर्थिक गलियारे की स्थापना पर सबकी सहमति बनाई। साथ ही, नई दिल्ली घोषणापत्र में रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आलोचना भी नहीं होने दी।

फायदा: आर्थिक गलियारे पर सहयोग अरब देशों से लेकर यूरोप तक जहाजों और रेल नेटवर्क के जरिये भारत को नई पहुंच देगा। यह चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का कहीं मजबूत व बहुपक्षीय जवाब भी साबित हो सकता है। तय नजर आ रही रूस की आलोचना को सबसे ताकतवर देशों के मंच पर टालना भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हुई। 55 देशों के अफ्रीकी संघ को जी-20 का सदस्य बनवाना भारत की नई शक्ति साबित करता है।

महिलाओं को मिलेगी राजनीतिक ताकत

संविधान के 106वें संशोधन पर 28 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के साथ ही लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू हो गया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिये राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। नई जनगणना रिपोर्ट और परिसीमन के साथ यह आरक्षण प्रभावी हो जाएगा।

फायदा: विधायिकाओं में महिला सदस्यों की संख्या 10 से 15 फीसदी ही है। कई राज्यों में तो 10% से भी कम है। 33 प्रतिशत आरक्षण से यह संख्या चार गुना तक बढ़ जाएगी।

परिवार और विवाह संस्थाओं को संरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्तूबर को समलैंगिक विवाह को वैधता देने से इनकार कर यह विषय संसद के निर्णय पर छोड़ दिया। दो के मुकाबले 3 जजों के निर्णय से इस मामले में दायर 20 से अधिक याचिकाओं का निस्तारण हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कानून बनाना व्यवस्थापिका का विषय करार दिया। माना कि यह कोर्ट का काम नहीं। बच्चा गोद लेने के समलैंगिक जोड़े के अधिकार की याचिकाएं भी खारिज हुईं।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि समलैंगिक समुदायों के साथ नीतिगत व व्यावहारिक भेदभावों की जांच उच्चस्तरीय समिति करेगी। समलैंगिक विवाहों को वैधता देने से परिवार व विवाह संस्थाओं के लिए पैदा हो रहे खतरों पर सरकार ने कई तर्क रखकर इन संस्थाओं के संरक्षण को जरूरी बताया था।

फायदा: सरकार की पहल के बाद समलैंगिक समुदायों को अपने साथी का कानूनन प्रथम संबंधी कहलाने, साथी के अस्पताल में भर्ती होने पर उसके लिए चिकित्सकीय निर्णय में रजामंदी देने, साझे बैंक खाते खोलने, विरासत पर अधिकार से जुड़े विवादों में भविष्य में राहत मिल सकती है।

अवसर कोई भी हो…चुनौती कितनी भी बड़ी हो…देश के साथ नागरिक हर कदम पर साथ खड़े रहे। यही एकजुटता हमें उस मुकाम तक ले गई, जिसने हमारी पहचान को और पुख्ता किया। दुनिया के मंच पर हर क्षेत्र में हमारी तूती बोली, तो मनोरंजन से लेकर रक्षा तक हम सबसे बेहतर साबित हुए।

उत्तरकाशी हादसा: 17 दिन का संघर्ष, सुरंग के मलबे में दबे 41 मजदूर बचा लिए

12 नवंबर सुबह साढ़े 5 बजे उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग का एक हिस्सा निर्माण के दौरान ढह गया। यहां काम कर रहे 41 मजदूर सुरंग में 200 मीटर भीतर ढहे हिस्से के 60 मीटर लंबे मलबे के पार फंसे थे। उन्हें बचाने में जुटे कर्मियों को कई बार असफलता मिली, 47 मीटर खोदाई के बाद ड्रिलिंग और ऑगर मशीनें खराब हुईं या फंस गईं, लेकिन किसी ने हार नहीं मानी। मलबे में तीन पाइप डाल कर मजदूरों तक भोजन और अन्य राहत सामग्री पहुंचाई गई। दिन बीतने के साथ मजदूरों की कुशलता को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच मशीनों के असफल होने के बाद हाथों से सुरंग खोदने में माहिर रैट माइनर्स को लगाया गया। उनकी मेहनत और देशवासियों की प्रार्थनाओं के बीच अंतत: 28 नवंबर को सभी मजदूरों को पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

फायदा: समूचे देश ने फौलादी इरादा और ऐसी आपदा में रास्ता निकालने का जज्बा दिखाया। सरकारी एजेंसियां, सेना और आर्नल्ड डिक्स व क्रिस कूपर जैसे विदेशी सुरंग विशेषज्ञों की मदद रंग लाई। इस हादसे से सबक लेकर एनएचएआई ने देश में बनाई जा रही सभी 29 सुरंगों की जांच कराने और ऐसी सुरंगों के निर्माण के सुरक्षा प्रोटोकॉल नए सिरे से तय करने के निर्देश दिए।

नाटू-नाटू पर दुनिया झूमी

ऑस्कर अवाॅर्ड में भारतीय फिल्म ‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ को 2023 में शॉर्ट डॉक्यूमेंटरी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ चुना गया। यह किसी भारतीय की ऑस्कर पाने वाली पहली फिल्म भी बनी। आरआरआर फिल्म के गीत नाटू-नाटू ने भी ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ ओरिजनल गीत का अवॉर्ड जीता। भारतीय सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ रही है, जो मनोरंजन उद्योग के लिए फायदेमंद साबित होगा। किसी देश के सिनेमा और मनोरंजन सामग्री का विश्व स्तर पर लोकप्रिय होना ‘सॉफ्ट पावर’ माना जाता है। इसके जरिये दुनिया में देश का सांस्कृतिक प्रभाव और तेजी से बढ़ेगा। भारतीय सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान मनोरंजन उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता हमारी संस्कृति को अलग मुकाम दिलाएगी।

एशियाई खेल, ऐतिहासिक भारत

हांगझोऊ एशियाई खेल में भारत ने रिकॉर्ड 107 मेडल हासिल किए। इनमें 28 स्वर्ण पदक थे। अब तक हुए 19 एशियाई खेलों में यह सर्वाधिक हैं। 2018 जकार्ता के 70 मेडल के रिकॉर्ड को तोड़ने के साथ ही एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा 29 पदक हासिल हुए। ऐसे श्रेष्ठ प्रदर्शनों से प्रोत्साहित होकर बच्चे एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, कुश्ती, निशानेबाजी, बैडमिंटन में आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में ये स्पर्धाएं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के बेहतर प्रदर्शन का रास्ता बनाएंगी।

भारत देगा सुंदरता का ताज

गत सितंबर में घोषणा हुई कि भारत 2 मार्च, 2024 को मिस वर्ल्ड सौंदर्य स्पर्धा की मेजबानी करेगा। सौंदर्य के इस मुकाबले के जरिये दुनिया को खूबसूरत भारत से भी रूबरू करवाया जा सकेगा। आयोजन 16 दिसंबर से शुरू होना था, लेकिन बाद में इसे मार्च तक टाल दिया गया। आयोजन में 100 देश शामिल होंगे। इस मौके को वैश्विक आयोजन सफलता से करवाने और देश की खूबसूरत जगहें दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए भी भुनाया जा सकता है।

बदला टीवी देखने का तरीका

साल 2023 में ओवर द टॉप (ओटीटी) पर स्ट्रीमिंग के कई रिकॉर्ड बने और टूटे। 15 नवंबर को विश्वकप क्रिकेट में भारत-न्यूजीलैंड के बीच सेमीफाइनल मुकाबला ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी-हॉटस्टार पर 5.3 करोड़ लोगों ने एकसाथ देखा और वैश्विक रिकॉर्ड बनाया। भारत-पाकिस्तान मैच 3.5 करोड़ लोगों ने देखा। जवान फिल्म को ओटीटी पर 1.49 करोड़ घंटे की व्यूअरशिप मिली।

अगस्त में जिओ सिनेमा पर 10 करोड़ लोगों ने तीन हजार करोड़ मिनट बिग बॉस देखा। 8 हफ्ते के इस शो के वीडियो 245 करोड़ बार देखे गए। चलन बताता है कि मनोरंजन पाने की हमारी आदत में बुनियादी बदलाव आ चुका है। देश में ओटीटी स्ट्रीमिंग 47 प्लेटफॉर्म सेवाएं दे रहे हैं। 2018 में 2,200 करोड़ का यह बाजार विशेषज्ञों के अनुसार 2030 तक 100 गुना बढ़कर 1.25 लाख करोड़ के पार चला जाएगा।

अर्थव्यवस्था की छलांग, जीडीपी में अनुमान से ज्यादा वृद्धि

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2024 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7 प्रतिशत रखा था। इसे पिछले अनुमान 6.5 प्रतिशत से आगे बढ़ाया गया था। लेकिन वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में ही जीडीपी वृद्धि दर इससे भी ज्यादा 7.6 प्रतिशत आंकी गई। तेज वृद्धि दर से भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने और जीडीपी पांच लाख करोड़ डॉलर के पार पहुंचाने के लक्ष्य कम समय में हासिल हो सकेंगे। विश्व में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के साथ विश्वसनीय आर्थिक शक्ति के रूप में भी हमें पहचान मिलेगी।

बाजार नई ऊंचाई पर

सेंसेक्स और निफ्टी ने नई ऊंचाई छुई। दिसंबर में सेंसेक्स ने 72 हजार और निफ्टी ने भी 21 हजार का स्तर पार कर लिया। घरेलू व विदेशी निवेशकों के भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते विश्वास को इस तेजी की वजह माना जा रहा है। आने वाले समय में भी यह तेजी बनी रहने का अनुमान अर्थशास्त्री दे रहे हैं। निवेशकों का विश्वास बढ़ने के मायने हैं कि वे भारतीय अर्थव्यवस्था और देसी कंपनियों के आगे बढ़ने को लेकर आश्वस्त हैं। यह आर्थिक प्रगति को और तेजी देगा।

रक्षा: सौ फीसदी आयात से रिकॉर्ड निर्यात तक

भारत रक्षा क्षेत्र में सौ फीसदी आयात वाले देश से सैन्य उपकरण निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शुमार हो गया है। रक्षा मंत्रालय ने सितंबर में बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 में 85 देशों को 15,920 करोड़ रुपये रिकॉर्ड रक्षा निर्यात किया गया। साल 2014 के मुकाबले इसमें 23 गुना वृद्धि हुई।

देश को फायदा

रक्षा क्षेत्र में विदेशी स्रोतों से खरीद 2018-19 के मुकाबले 2022 तक 46 प्रतिशत घटी। इसका बड़ा फायदा भारतीय छोटे-बड़े उद्योगों को हो रहा है। 100 से अधिक उद्योग रक्षा निर्यात के लिए काम कर रहे हैं। कई देश भारत की सरकारी कंपनी एचएएल की बनाई मिसाइलों जैसे ब्रह्मोस व लड़ाकू विमानों जैसे तेजस की खरीद में रुचि ले रहे हैं, एमओयू कर रहे हैं।

भारतीय प्रतिभाओं से चल रही दुनिया

टेक और कई अन्य क्षेत्रों में दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ पदों पर भारतीयों के पहुंचने का सिलसिला इस साल भी जारी रहा। स्टारबक्स में लक्ष्मण नरसिम्हन, यूट्यूब में नील मोहन, आईटी कंपनी कॉग्निजेंट में रवि कुमार एस, अमेरिकी ओटीटी प्लेटफॉर्म टूबी में अंजलि सूद सीईओ बनने वाले नए नामों शामिल हुए। इन्हें मिलाकर इस समय 1 हजार करोड़ डॉलर से अधिक बाजार मूल्य की प्रमुख 30 कंपनियों के सीईओ पद भारतीयों के पास हैं। 2021 में यह संख्या 12 थी।

इनमें माइक्रोसॉफ्ट में सत्या नडेला, गूगल में सुंदर पिचाई, नोवार्टिस में वसंत नरसिम्हन, अडोबी में शांतनु नारायण, आईबीएम में अरविंद कृष्णा प्रमुख हैं। वैश्विक कंपनियों की बागडोर भारतीयों के हाथों में आना भारतीयों की कार्यकुशलता का वैश्विक साक्ष्य बन चुका है। भारतीयों की पहचान कर्मठ, मेहनती और प्रतिभावान कर्मचारियों के साथ बेहतर नेतृत्व क्षमता के लिए बन रही है।

इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात एक साल में 49 फीसदी बढ़ा

साल 2022 के मुकाबले भारत ने 2023 में 49 प्रतिशत ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्यात किए। यह निर्यात 2,530 करोड़ डॉलर आंका गया। पहली बार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्यात ने कपड़ों के निर्यात को भी पीछे छोड़ दिया। मोबाइल फोन और घरेलू उपकरणों जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की मांग तकनीकें बदलने के साथ न केवल बनी रहती हैं, बल्कि बढ़ भी रहीं हैं। देश में ही इनके उत्पादन और सरप्लस उत्पादन के निर्यात पर ध्यान देकर हमने आर्थिक प्रगति को नई शक्ति दे दी है।

एपल जैसी कंपनियों के स्टोर अब देश में ही

दुनिया की प्रमुख फोन निर्माता कंपनी एपल ने मुंबई व दिल्ली में अपने पहले दो रिटेल स्टोर खोले और भारत में इस शृंखला का विस्तार करने के संकेत दिए। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार जनवरी से जून के बीच भारत में अंतरराष्ट्रीय कारोबार (उत्पादों व सेवाओं का आयात-निर्यात) 80 हजार करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया। साथ ही, आयात 44,170 करोड़ डॉलर से 5.9 प्रतिशत घटकर 41,550 पर आ गया। जीटीआरआई के अनुसार भारत का सेवा आधारित निर्यात 17.7% बढ़ रहा है। यह वृद्धि दर बनी रही, तो अर्थव्यवस्था से रोजगार तक में बढ़ोतरी होगी।

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