आशा कार्यकर्ता अब गांव में ही करेंगी कैंसर की जांच, जानिए कैसे काम करेगी यह नई एआई तकनीक

कैंसर के खिलाफ भोपाल GMC का बड़ा नवाचार: अब एआई डिवाइस और 'मुख आरोग्य ऐप' से गांवों में भी हो सकेगी ओरल कैंसर की शुरुआती जांच

आशा कार्यकर्ता अब गांव में ही करेंगी कैंसर की जांच, जानिए कैसे काम करेगी यह नई एआई तकनीक

भोपाल: मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (GMC) के दंत रोग विभाग ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कॉलेज की टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘ओरल कैंसर स्क्रीनिंग डिवाइस’ और ‘मुख आरोग्य ऐप’ विकसित किया है। इस तकनीक की मदद से अब गांव-देहात और दूरदराज के इलाकों में भी ओरल (मुख) कैंसर की शुरुआती स्टेज में ही पहचान आसानी से की जा सकेगी।

महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. कविता एन सिंह के मार्गदर्शन में यह नवाचार संभव हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनुज भार्गव, डॉ. ऋचा शर्मा और डॉ. अनिमेष बरोड़िया की टीम ने मिलकर इसे तैयार किया है।

क्या है इस तकनीक में खास?

  1. AI स्क्रीनिंग डिवाइस: यह पोर्टेबल डिवाइस मुंह के अंदर की हाई-क्वालिटी फोटो लेगा और एआई एल्गोरिदम की मदद से तुरंत बता देगा कि कोई कैंसर का संदिग्ध लक्षण है या नहीं।

  2. मुख आरोग्य मोबाइल ऐप: यह ऐप विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं (ASHA Workers), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के स्टाफ के लिए डिजाइन किया गया है।

  3. गांव में ही जांच व तुरंत रेफरल: स्वास्थ्य कर्मी इस ऐप के जरिए गांव-गांव जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगे और संदिग्ध मरीज पाए जाने पर उन्हें तुरंत बड़े अस्पतालों में रेफर कर सकेंगे।

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शुरुआती पहचान से बचेगा जीवन

डॉ. अनुज भार्गव के अनुसार, कैंसर का अगर शुरुआती चरण में ही पता चल जाए तो मरीज के ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके साथ ही पहली स्टेज में इलाज काफी आसान, कम खर्चीला और बेहद असरदार साबित होता है। आशा कार्यकर्ता अब गांव में ही करेंगी कैंसर की जांच, जानिए कैसे काम करेगी यह नई एआई तकनीक

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