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पट्टे की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे दो दशकों से काबिज 60 भूमिहीन आदिवासी परिवार, दी आंदोलन की चेतावनी

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कटनी(YASHBHARAT.COM)। अपनी आजीविका और छत को बचाने की जद्दोजहद में जुटे कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील के करीब 60 आदिवासी परिवार बुधवार को अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। मध्य करौंदी गांव (बम्हनी पंचायत) के इन परिवारों ने सामूहिक रूप से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उस जमीन पर मालिकाना हक (पट्टा) देने की मांग की है, जिस पर वे पिछले 20 वर्षों से खेती कर रहे हैं।

खेती ही जीवन यापन का एकमात्र सहारा

ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे हनुमान सिंह गौड़ ने बताया कि ये सभी परिवार पूरी तरह भूमिहीन हैं। वे वर्ष 2005 से ही गांव की ‘घास की जमीन’ पर खेती कर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। उनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। हालांकि, लंबे समय से काबिज होने के बावजूद उनके पास कोई वैध सरकारी दस्तावेज नहीं है, जिसके कारण उन्हें हमेशा प्रशासन द्वारा बेदखली का डर सताता रहता है।

प्रशासन की ‘खामोशी’ से बढ़ रहा ग्रामीणों में भड़क रहा आक्रोश

ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पट्टे की मांग को लेकर वे पहली बार गुहार नहीं लगा रहे हैं। इससे पहले भी तहसील स्तर और जनसुनवाई में कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बार-बार मिल रहे आश्वासनों से थक-हारकर अब इन परिवारों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

ग्रामीणों की मुख्य मांगों पर एक नज़र 

1=60 भूमिहीन परिवारों को तत्काल ‘वनाधिकार पट्टा’ या किसी सरकारी योजना के तहत मालिकाना हक दिया जाए।

2=राजस्व दस्तावेजों में ग्रामीणों के नाम दर्ज किए जाएं।

3= जब तक पट्टे की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक उन्हें जमीन से बेदखल न किया जाए।

ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

आदिवासी समूहों ने स्पष्ट शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, कलेक्टर कार्यालय ने ग्रामीणों का ज्ञापन स्वीकार कर लिया है और मामले की उचित जांच कराने का आश्वासन दिया है।

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