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कभी सोचा है कि ग्रेड सेपरेटर के ऊपर ट्रेन हुई डीरेल तो क्या होगा?

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कटनी(YASHBHARAT.COM)। वैसे तो रेल दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कई दुर्घटनाओं में जान माल का भी नुकसान होता है। रेलवे सक्रियता के साथ काम करके दुर्घटना वाले स्थान पर सुधारकार्य कर प्रभावित रेल यातायात को भी बहाल कर देता है लेकिन कभी आपने सोचा है कि आपके शहर में नवनिर्मित ग्रेड सेपरेटर (रेल फ्लाईओवर) के ऊपर ट्रेन डीरेल (पटरी से उतरना) होने पर भीषण दुर्घटना हो सकती है। जिसमें मालगाड़ी के खाली व भरे डिब्बे ऊंचाई से नीचे गिर सकते हैं। इससे पुल को भारी नुकसान, जान-माल की व्यापक हानि और दोनों स्तरों (ऊपर और नीचे) पर रेल परिचालन कई दिनों के लिए ठप हो सकता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ग्रेड सेपरेटर के नीचे कई जगह सडक़ भी है। जिसमें आवागमन भी अधिक रहता है। ऐसे में यदि ग्रेड सेपरेटर के ऊपर डीरेल होने के बाद मालगाड़ी के खाली व भरे डिब्बे गिरने से जान-माल का ज्यादा नुकसान भी हो सकता है। यदि ट्रेन का संतुलन पूरी तरह बिगड़ता है तो डिब्बे ग्रेड सेपरेटर के ऊंचे ढांचे से नीचे गिर सकते हैं। हादसे के बाद राहत दल को बुलाना और क्रेन/हाइड्रोलिक जैक की मदद से डिब्बों को हटाना एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है। ग्रेड सेपरेटर में लगी लोहे की गार्डर को नुकसान पहुंचने पर मरम्मत में लंबा समय लग सकता है। कुल मिलाकर ग्रेड सेपरेटर (रेल फ्लाईओवर) के ऊपर ट्रेन के डिरेल (पटरी से उतरने) होने पर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। डिब्बों के नीचे खाई या नीचे का ट्रैक या सडक़ होने से जान-माल का बड़ा नुकसान संभव है। साथ ही बचाव कार्य (रेस्क्यू) भी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रेलसूत्रों के अनुसार चूंकि ग्रेड सेपरेटर काफी ऊंचाई पर है, डिब्बे पटरी से उतरकर नीचे सडक़ पर गिर सकते हैं। जिससे रेलवे के लिए रेस्क्यू चुनौती भरा होगा। खासकर क्रेन और हाइड्रोलिक जैक जैसे भारी उपकरणों को ऊंचाई पर पहुंचाने में रेलवे को पसीना बहाना पड़ सकता है। ग्रेड सेपरेटर में डीरेल की वजह से ऊपर और नीचे के दोनों रास्तों पर ट्रेनों का परिचालन लंबे समय के लिए रुक सकता है। वहीं ग्रेड सेपरेटर के ढांचे(गार्डर) क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जिसकी मरम्मत में लंबा समय लग सकता है। गौरतलब है कि शहर में बन रहे देश के सबसे लंबे (लगभग 33.40 किमी) रेल ग्रेड सेपरेटर (वायडक्ट) के एक सिरे का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा उसके ऊपर से मालगाडिय़ों का परिचालन भी शुरू हो चुका है जबकि दूसरे सिरे पर अभी कार्य प्रगति पर है तथा इसका कार्य भी शीघ्र पूर्ण कराने में रेलवे लगा हुआ है। उल्लेखनीय है कि कटनी ग्रेड सेपरेटर (उड़ता जंक्शन) यह 1248 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रहा एशिया के सबसे बड़े रेलवे वायडक्ट्स में से एक है। इसका उद्देश्य बीना-कटनी रेलखंड पर कोयला और मालगाडिय़ों के सुगम परिवहन के लिए इस एलिवेटेड ट्रैक(फ्लाईओवर) को बनाया गया है ताकि नीचे के रेल यातायात में बाधा न आए। वर्तमान स्थिति में अप ट्रैक का सफल ट्रायल किया गया है और मालगाडिय़ां चल रही हैं। रेलवे के नियमों के अनुसार ऐसे हादसों में लापरवाही पाए जाने पर कड़ी सजा और जुर्माना हो सकता है।

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