भोपाल। चुनाव में आचार संहिता के उल्लंघन और शिकायतों पर कार्रवाई न होने को लेकर कलेक्टरों के खिलाफ करीब आधा दर्जन शिकायतें पहुंच गई हैं। एक शिकायत पर भिंड कलेक्टर आशीष कुमार को हटाया जा चुका है तो नए कलेक्टर धनराजू एस. के खिलाफ भी एक शिकायत हो गई है।
इसके अलावा विदिशा, रीवा, उज्जैन और खंडवा के कलेक्टरों से भी विभिन्न् मामलों में चुनाव आयोग ने जवाब-तलब किया है। रीवा में मंत्री राजेंद्र शुक्ला की फोटो लगा होर्डिंग नहीं हटाने को लेकर नगर निगम आयुक्त से जवाब मांगा गया है। उधर, समृद्ध मध्यप्रदेश अभियान को लेकर भोपाल कलेक्टर सुदाम खाड़े ने बुधवार देर शाम तक रिपोर्ट नहीं भेजी।
सूत्रों के मुताबिक कलेक्टरों के खिलाफ ज्यादातर शिकायतें सूचना का अधिकार आंदोलन के संयोजक अजय दुबे ने सीधे चुनाव आयोग में दर्ज कराई हैं। भिंड के कलेक्टर रहे आशीष कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने शिकायत की थी, जिसके चलते चुनाव आयोग ने उन्हें हटवा दिया।
वहीं, नए कलेक्टर धनराजू एस. को लेकर दुबे ने उनकी सिवनी में पदस्थापना के दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों के साथ बैठे वायरल फोटो का हवाला देते हुए उन्हें हटाने की मांग की है। फोटो में कुछ लोग शराब पीते नजर आ रहे हैं। इसी तरह उज्जैन कलेक्टर मनीष सिंह को लेकर जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सेल्फी वाली फोटो को लेकर शिकायत की गई है।
रीवा कलेक्टर के खिलाफ मंत्री राजेंद्र शुक्ला के फोटो वाले होर्डिंग सरकारी संपत्ति में लगे होने को लेकर शिकायत हुई। इस मामले में उप निर्वाचन अधिकारी रीवा ने नगर निगम आयुक्त रीवा से जवाब मांगा है।
वहीं, खंडवा कलेक्टर के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन करते हुए जागरुकता रथ चलवाने की शिकायत हुई है। विदिशा कलेक्टर को हटाने को लेकर हिंदू उत्सव समिति ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में शिकायत की है। उधर, भोपाल कलेक्टर सुदाम खाड़े ने प्रदेश कांग्रेस और आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज त्रिपाठी की शिकायत पर बुधवार देर शाम तक रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को नहीं दी। इसमें मामले में आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
शिकायतों को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव का कहना है कि दो हजार से ज्यादा शिकायतें अभी तक हो चुकी हैं। चुनाव आयोग के स्तर पर भी साढ़े सात सौ से ज्यादा शिकायत पोर्टल पर दर्ज हुई हैं। इनमें से पांच सौ से ज्यादा का निराकरण भी हो चुका है, जो भी शिकायत आती है उस पर संबंधित जिले से प्रतिवेदन लेकर चुनाव आयोग को भेजा जाता है। कई मामलों में कार्रवाई भी हो चुकी हैं। कुछ के जवाब आना अभी बाकी हैं।
