कोरोना मरीज का लंग ट्रांसप्लांट,प्रदेश का पहला मामला

यशभारत अपडेट@आशीष शुक्ला

भोपाल यशभारत-प्रदेश के जाने-माने डॉक्टर और गांधी मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. आरके जैन की शुक्रवार को चेन्नई के एमजीएम हॉस्पिटल में लंग ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई। उन्हें बेंगलुरु के एक ब्रेनडेड मरीज के लंग्स ट्रांसप्लांट किए गए हैं।

प्रदेश में यह पहला मौका है जब कोरोना संक्रमण से फेफड़े खराब होने के कारण किसी मरीज की लंग ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई। दरअसल, कोविड-19 संक्रमण के चलते डॉ. जैन के फेफड़े इस साल की शुरुआत में पूरी तरह से खराब हो गए थे। इसके चलते उन्हें गंभीर हालत में एयर एंबुलेंस से जनवरी के दूसरे सप्ताह में चेन्नई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां लंग ट्रांसप्लांट सर्जरी नहीं होने तक उन्हें एक्मो मशीन के सपोर्ट पर रखा गया था

चेन्नई रैफर किए जाने से पहले वे इलाज के लिए भोपाल के नेशनल हॉस्पिटल में भर्ती थे, लेकिन सेहत में सुधार नहीं होने पर अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें चेन्नई के एमजीएम हॉस्पिटल रैफर कर दिया था।

एयर एंबुलेंस से चेन्नई के एमजीएम हॉस्पिटल में किया गया था शिफ्ट सर्जरी के बाद तीन दिन में पता चलेगा ट्रांसप्लांट का रिस्पॉन्स बेंगलुरु से ब्रेनडेड मरीज के फेफड़े चेन्नई पहुंचे… दोपहर 3:30 बजे डॉ. जैन को ऑपरेशन थिएटर में किया शिफ्ट एमजीएम मेडिकल कॉलेज चेन्नई के डॉक्टरों ने शुक्रवार दोपहर 3:30 बजे डॉ. आरके जैन को लंग ट्रांसप्लांट के लिए ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया। इससे आधे घंटे पहले बेंगलुरु के एक ब्रेनडेड मरीज के फेफड़े एमजीएम हॉस्पिटल पहुंचे। ऑपरेशन रात सवा 12 बजे तक चला।

वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा था…

नेशनल हॉस्पिटल के सूत्रों ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बाद हुए सीटी स्कैन में उनके फेफड़े 90% संक्रमित पाए गए थे। इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर भी रखा गया था। अस्पताल में दिए गए इलाज से उनकी सेहत में सुधार नहीं होने पर पर जिन्होंने एयर एंबुलेंस से एमजीएम हॉस्पिटल चेन्नई में भर्ती कराया है। जहां उनकी हालत 1 महीने से गंभीर बनी हुई है। अस्पताल के डॉक्टरों ने 2 सप्ताह पहले डॉ. जैन की लंग ट्रांसप्लांट सर्जरी कराने की सलाह परिजनों को दी थी

फेफड़ों का काम करती है एक्मो मशीन

जीएमसी के पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. लोकेंद्र दवे ने बताया कि लंग फाइब्रोसिस होने पर अथवा फेफड़ों में संक्रमण 90% से ज्यादा बढ़ने पर मरीज को एक्मो मशीन पर शिफ्ट किया जाता है। इसमें मरीज के फेफड़ों का काम एक्मो मशीन करती है। इससे फेफड़ों को आराम मिलता है। 100 मरीजों में से 25 फीसदी मरीज स्वस्थ हो जाते हैं, जबकि असफलता की दर 75 फीसदी है।

एक्मो मशीन की मदद से मरीज का एक दिन का इलाज खर्च करीब 60 हजार रुपए आता है। जबकि पहले दिन मरीज को एक्मो पर शिफ्टिंग के समय दवाओं सहित अन्य खर्च करीब 3 लाख रुपए बैठता है। इस तकनीक से मरीज के ब्लड की कार्बन डायऑक्साइड को निकाला जाता है और ऑक्सीजन को आर्टिफिशियल तरीके से ब्लड में मिलाया जाता।

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