ना सड़क है, ना स्कूल भवन- सतना में 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे छात्र, प्रशासन के आश्वासन पर टूटा अनशन
Ground Report MP: दावों की खुली पोल-सतना में सड़क और स्कूल की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठीं छात्राएं, खाट पर अस्पताल पहुंचीं बुजुर्ग महिला
ना सड़क है, ना स्कूल भवन- सतना में 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे छात्र, प्रशासन के आश्वासन पर टूटा अनशन
ना सड़क है, ना स्कूल भवन- सतना में 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे छात्र, प्रशासन के आश्वासन पर टूटा अनशन
सतना: मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र रैगांव से विकास के सरकारी दावों की पोल खोलती तस्वीरें सामने आई हैं। ग्राम पंचायत गिंजरा के ग्राम छुलहा और बौलिहा की स्कूली छात्राएं एवं ग्रामीण सड़क और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ग्रामीण एलआर जांगड़े, तहसीलदार प्रज्ञा द्विवेदी और जनपद सीईओ प्रतिपाल बागरी ने मौके पर पहुंचकर आश्वासन दिया, जिसके बाद छात्राओं ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की।
भूख हड़ताल पर बैठीं छात्राएं, ये हैं प्रमुख 4 मांगें
रैगांव क्षेत्र के छुलहा और बौलिहा गांव में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और ग्रामीण धरने पर बैठे रहे। ग्रामीणों और छात्रों की मुख्य मांगें निम्न हैं:
शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल करसरा के लिए तत्काल स्थायी भवन का निर्माण कराया जाए।
करसरा-बौलिहा मार्ग की बदहाल सड़क का तत्काल पुनर्निर्माण हो।
बौलिहा प्राथमिक शाला की जमीन को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए।
लगभग 1,000 से 1,200 आबादी वाले बौलिहा गांव को ‘राजस्व ग्राम’ घोषित किया जाए।
‘खाट बनी एंबुलेंस, दलदल बनी सड़क’
रैगांव विधानसभा के गौरैया ग्राम पंचायत के रामपुरा गांव की स्थिति बेहद दर्दनाक है। यहां डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क वर्षों से दलदल और गड्ढों में तब्दील है, जिससे गांव तक एंबुलेंस का पहुंचना नामुमकिन हो गया है।
खाट पर मरीज: शनिवार को रामपुरा गांव की एक बुजुर्ग महिला की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन सड़क न होने के कारण एंबुलेंस गांव में नहीं घुस सकी।
लाचारी की तस्वीर: मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों को बुजुर्ग महिला को खाट (चारपाई) पर उठाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सका।
दावों और हकीकत में भारी फर्क
मंत्रियों और नेताओं द्वारा मंचों से किए जाने वाले विकास के दावों की चमक इस इलाके में सरकारी फाइलों तक ही सीमित नजर आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब राज्यमंत्री के अपने ही क्षेत्र में स्कूल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए छात्राओं को भूख हड़ताल पर बैठना पड़े, तो अन्य सुदूर इलाकों का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।