ज्ञानवापी विवाद सुलझाने की ‘सुप्रीम पहल’ कोर्ट में ही फेल: हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों का मध्यस्थता से साफ इनकार; अब मुकदमों से ही होगा अंतिम फैसला
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बहुचर्चित ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद में मंगलवार को एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट की अनूठी पहल पर आपसी समझौते और सुलह के लिए वाराणसी लोक अदालत के मेडिएशन सेंटर (मनोरंजन कक्ष) में बुलाई गई हाई-प्रोफाइल मध्यस्थता बैठक पूरी तरह से बेनतीजा और विफल रही। करीब 20 मिनट तक चली इस बैठक के बाद हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही पक्षों ने साफ कर दिया कि वे किसी भी तरह के समझौते के पक्ष में नहीं हैं और अब इस ऐतिहासिक विवाद का नतीजा केवल और केवल अदालती मुकदमे के अंतिम फैसले से ही निकलेगा।
‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ दाखिल हुआ हिंदू पक्ष, रखी बेबाक बात
बैठक में शामिल होने के लिए श्रृंगार गौरी केस से जुड़ीं सभी वादिनी महिलाएं, पक्षकार और पैरोकार ‘हर-हर महादेव’ के नारे लगाते हुए लोक अदालत परिसर में पहुंचे।
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हिंदू पक्ष का रुख: हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी और वादिनी रेखा पाठक ने ‘यशभारत’ से विशेष बातचीत में कहा, “ज्ञानवापी आदि विश्वेश्वर का मूल मंदिर है, जिसके प्रत्यक्ष साक्ष्य आज भी वहां चिल्ला-चिल्लाकर गवाही दे रहे हैं। हम बिना किसी शर्त के बातचीत के लिए मेज पर बैठे थे, लेकिन मुस्लिम पक्ष को यह स्वीकार नहीं था। अब चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सुनवाई पर वर्तमान में रोक लगा रखी है, जिसकी अगली तारीख 27 जुलाई 2026 तय है, इसलिए हम अदालत से ही त्वरित सुनवाई की गुहार लगाएंगे।”
मुस्लिम पक्ष की दलील: “36 मुकदमे हैं, समझौता किससे और कैसे करें?”
दूसरी तरफ, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से बैठक में शामिल हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं (मुमताज अहमद, रईस अंसारी, तौहीद और एखलाक अहमद) ने भी साफ किया कि समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है:
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वक्फ संपत्ति का दावा: मुस्लिम पक्ष ने दोहराया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने का दावा पूरी तरह निराधार है और यह परिसर एक वैध वक्फ संपत्ति है।
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मुकदमों की भरमार: अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने व्यावहारिक समस्या उठाते हुए कहा कि उनके खिलाफ ज्ञानवापी को लेकर अलग-अलग कोर्ट में करीब 36 मुकदमे दायर हैं। ऐसे में यह तय करना नामुमकिन है कि किस पक्ष से बात की जाए और क्या सभी पक्ष उस फैसले से एकमत हो पाएंगे?
लिहाजा, अब आगामी 21, 22 और 23 तारीख को सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर होने वाली आगे की कोई भी सुलह प्रक्रिया आयोजित नहीं होगी।
इन 4 प्रमुख मुकदमों की फाइलों पर होनी थी बात
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को देश के इस सबसे संवेदनशील धार्मिक विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को लोक अदालत भेजा था। इसमें मुख्य रूप से वाराणसी के जिला अदालत (ADJ Court) में लंबित 4 बड़े मामलों की फाइलें शामिल थीं, जिनमें:
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राखी सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (मुख्य श्रृंगार गौरी वाद)
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लक्ष्मी देवी की याचिका
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सोमनाथ व्यास (व्यास जी का तहखाना) का मामला और अन्य संबंधित वाद।
छावनी में तब्दील रही कचहरी, भारी फोर्स तैनात
बैठक के मद्देनजर वाराणसी कचहरी और लोक अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा के बेहद कड़े और अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। मनोरंजन कक्ष और कोर्ट रूम के बाहर भारी संख्या में प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) और सिविल पुलिस बल तैनात था। लोक अदालत के भीतर केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश की अनुमति दी गई थी, जिनके नाम ज्ञानवापी मुकदमों की फाइलों में सीधे तौर पर पक्षकार या अधिवक्ता के रूप में दर्ज थे।
इस मध्यस्थता के विफल होने के बाद अब सबकी निगाहें 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली बड़ी सुनवाई पर टिक गई हैं।
– विशेष ब्यूरो, यशभारत डॉट कॉम
