आवासीय नक्शा….और चल रहा था स्वाद का कारोबार
नियमों की धज्जियां उड़ाने के आरोपों के बीच जेसीबी लेकर पहुंचा नगर निगम, कार्रवाई से पहले संचालक ने लिखकर दिया रेस्टोरेंट बंद रहेग
कटनी। शहर में नियम-कायदों को लेकर आम आदमी से सख्ती और रसूखदारों के मामलों में नरमी की चर्चाएं अक्सर सुनाई देती हैं, लेकिन स्वाद रेस्टोरेंट का मामला नगर निगम की कार्यप्रणाली और भवन उपयोग के नियमों पर कई तीखे सवाल खड़े कर रहा है।
कलेक्टर कार्यालय के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर संचालित इस प्रतिष्ठान पर नगर निगम की टीम जेसीबी और अमले के साथ पहुंची तो इलाके में हड़कंप मच गया। शिकायत यह थी कि जिस भवन का नक्शा कथित तौर पर आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत है, उसी स्थल पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। मामला यहीं खत्म नहीं होता। निगम को मौके पर कथित अवैध कब्जों की शिकायत भी मिली थी। यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि रेस्टोरेंट की अनुमति थी या नहीं सवाल यह भी है कि अगर स्वीकृति आवासीय थी तो व्यावसायिक गतिविधि शुरू कैसे हुई और इतने समय तक चलती कैसे रही
बड़ा सवाल,नक्शा आवासीय तो कारोबार किस अनुमति से
यदि नगर निगम के रिकॉर्ड में संबंधित भवन का उपयोग आवासीय दर्ज है, तो फिर वहां रेस्टोरेंट जैसी व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की वैधानिक स्थिति क्या थी
क्या उपयोग परिवर्तन की अनुमति ली गई थी
क्या रेस्टोरेंट संचालन के लिए जरूरी अनुमति मौजूद थी
क्या निगम को इसकी जानकारी थी और अगर जानकारी थी, तो कार्रवाई इतनी देर से क्यों
इन सवालों का जवाब अब दस्तावेजों की जांच से सामने आना चाहिए। क्योंकि मामला कोई दूर-दराज के इलाके का नहीं, बल्कि कलेक्टर कार्यालय के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े प्रमुख क्षेत्र का बताया जा रहा है।
जेसीबी पहुंची तो मचा हड़कंप
सोमवार को नगर निगम का अमला अचानक जेसीबी मशीन के साथ स्वाद रेस्टोरेंट पहुंचा।
मौके पर निगम की टीम की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि मामला महज औपचारिक नोटिस या कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं था। अधिकारियों ने प्रतिष्ठान से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी ली और मौके पर संचालित गतिविधियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इसके साथ ही कथित कब्जों की शिकायत को लेकर भी मौके की स्थिति देखे जाने की बात सामने आई।
अंदर की बात: कार्रवाई से पहले ही क्यों देना पड़ा लिखित आश्वासन
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है। नगर निगम की टीम की कार्रवाई के बीच प्रतिष्ठान संचालक निलेश चौदहा ने अधिकारियों के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए और लिखित रूप से आश्वासन दिया कि संबंधित स्थल पर तत्काल प्रभाव से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जाएंगी। यानी रेस्टोरेंट का संचालन बंद रहेगा।
इतना ही नहीं, लिखित आश्वासन में यह भी कहा गया कि जब तक संबंधित स्थल पर व्यावसायिक गतिविधि अथवा रेस्टोरेंट संचालन के लिए वैध अनुमति प्राप्त नहीं कर ली जाती, तब तक संचालन नहीं किया जाएगा। सवाल यह है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप था तो रेस्टोरेंट बंद रखने का लिखित आश्वासन देने की जरूरत क्यों पड़ी
और यदि अनुमति का मामला लंबित था, तो फिर पहले से संचालन किस आधार पर हो रहा था,
अब किसकी बारी
अब निगाहें नगर निगम पर हैं। क्या निगम केवल लिखित आश्वासन लेकर मामला खत्म कर देगा या फिर यह जांच करेगा कि भवन का स्वीकृत नक्शा वास्तव में किस उपयोग के लिए है,मौके पर वास्तविक उपयोग क्या हो रहा था,रेस्टोरेंट संचालन की वैध अनुमति थी या नहीं,उपयोग परिवर्तन की अनुमति ली गई थी या नहीं,कथित कब्जों की शिकायत में कितनी सच्चाई है और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ था तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
क्योंकि सिर्फ रेस्टोरेंट बंद कराने से सवाल खत्म नहीं होंगे। सवाल यह है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति बनी ही कैसे।
जेसीबी गई….लेकिन मामला अभी बाकी है
नगर निगम की टीम संचालक के लिखित आश्वासन के बाद मौके से लौट गई। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। यदि जांच में आवासीय भवन में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधि संचालित किए जाने की पुष्टि होती है, तो यह केवल एक प्रतिष्ठान का मामला नहीं होगा। यह नगर निगम की निगरानी व्यवस्था और नियमों के पालन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेगा।क्योंकि आम नागरिक के लिए भवन निर्माण, नक्शा, उपयोग परिवर्तन और व्यावसायिक अनुमति के नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। फिर सवाल उठना स्वाभाविक है,क्या ये नियम सभी के लिए बराबर हैं।
राजनीतिक दबाव की चर्चा—सच क्या है
कार्रवाई के दौरान और उसके बाद शहर में यह चर्चा भी रही कि कार्रवाई को रुकवाने के लिए राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाने के प्रयास किए गए। हालांकि, इस संबंध में अभी तक नगर निगम अथवा संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। लेकिन यदि वास्तव में किसी कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास हुआ है, तो यह भी अपने आप में गंभीर विषय होगा।
अब निगाहें निगम की अगली कार्रवाई पर फिलहाल जेसीबी वापस लौट चुकी है और रेस्टोरेंट संचालक की ओर से संचालन बंद रखने का लिखित आश्वासन दिया जा चुका है। लेकिन असली कहानी अब शुरू होती है।
क्या निगम रिकॉर्ड खंगालेगा,क्या भवन के स्वीकृत नक्शे और वास्तविक उपयोग की जांच होगी, क्या कथित कब्जों की पैमाइश होगी,क्या जिम्मेदारी तय होगी या फिर कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। आवासीय नक्शे पर यदि वास्तव में व्यावसायिक कारोबार चल रहा था, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है और इतने समय तक प्रशासनिक निगरानी कहां थी। स्वाद पर पहुंची जेसीबी ने एक प्रतिष्ठान का दरवाजा भले बंद कराया हो, लेकिन उसने नगर निगम के सामने कई ऐसे सवाल खोल दिए हैं, जिनके जवाब अब सार्वजनिक होने चाहिए।
