नंद के घर आनंद भयो,जय कन्हैया लाल की जयकारे से गूंजा बालाजी नगर,7दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम

नंद के घर आनंद भयो,जय कन्हैया लाल की जयकारे से गूंजा बालाजी नगर,7दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम

कटनी।नदीपार स्थित बालाजी नगर पुरवार स्कूल के सामने विशाल पंडाल में वैकुण्ठवासी स्व भगवान दास दुबे की स्मृति में 7दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के धार्मिक आयोजन के चतुर्थ दिवस कथा व्यासपीठ 1008 श्री राजगुरु स्वामी बदरीप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने आज 10 अगस्त को श्रीमदभागवत कथा में जडभरत एवं वामन अवतार श्रीकृष्ण जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन किया।कथा प्रसंग पर श्रद्धालु गण भावविभोर हो गये।

कथा व्यासपीठ की अमृतमयी वाणी श्रवण करने बडी संख्या में माताओं बहनों श्रद्धालुओं की भीड उमडी। कथा सायं 4 बजे से प्रारंभ हुई।कथा में मुख्य यजमान श्रीमती पूनाबाई दुबे रही।

कथाव्यासपीठ महाराज जी ने जडभरत प्रसंग पर बताया कि मोह आसक्ति से जडभरत को हिरन का जन्म लेना पडा संसार के प्रेम में आसक्ति है जबकि भगवान के प्रेम में भक्त है,उन्होंने बताया कि संत महापुरुषों के पास अभिमान से नहीं जाना चाहिए बल्कि अज्ञानी और दीन बनकर जाना चाहिए।

 

संतत्व का मतलब चमत्कार नहीं-व्यासपीठ महाराज श्री

 

संतों के सत्संग और साथ से मनुष्य को मुक्ति मिलती है।दीनता ही जीवन को श्रेष्ठ बनाती है,जडभरत माया के जाव में फंसे।महाराज जी ने बताया कि संतत्व का मतलब चमत्कार नहीं यदि चमत्कार करने वाला बडा होता तो रावण के पास चमत्कार ही चमत्कार था उसे पूजा जाता।चमत्कार से प्रभुता-विशिष्टता को हासिल नहीं किया जा सकता।महाराज जी ने बताया कि भरतखंड से भारत वर्ष बना और भारत वर्ष के उपाष्ठ देवता नारायण इसलिये जीवन में बद्रीनाथ में अवश्य जाना चाहिए,कथा प्रसंग पर श्रीमदभागवत कथा स्वर्ग नर्क का महाराज जी ने विस्तार से वर्णन किया।

 

श्रीकृष्ण जन्म पर बधाई गीतों की धुन पर झूमे श्रद्धालु

 

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। व्यासपीठ से 1008 श्री राजगुरु स्वामी बदरीप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा प्रसंग के दौरान पूरा पंडाल नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जयकारों से गूंज उठा।

महाराज जी ने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं। श्रीकृष्ण का अवतार भी अत्याचार और अधर्म के विनाश तथा धर्म की स्थापना के लिए हुआ।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया। बाल स्वरूप श्रीकृष्ण की जीवंत झांकी आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं और प्रसाद का वितरण किया।

 

11अगस्त को श्रीकृष्ण बाल लीलाएं गोवर्धन उत्सव प्रसंग

 

11 अगस्त दिन मंगलवार श्री कृष्ण बाल लीलायें, गोवर्धन उत्सव12 अगस्त दिन बुधवार कंश वध, श्री कृष्ण रुकमणी विवाह महोत्सव 13 अगस्त दिन गुरुवार सुदामा चरित्र, व्यास पूजन कथा विश्राम, हवन आहुति के साथ कथा का समापन होगा।14 अगस्त दिन शुक्रवार कन्या भोजन प्रातः 10 बजे से दोपहर 11.30 तक व ब्राह्मण भोजन व दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है।युवा भाजपा नेता नीरज दुबे एवं

पं. राजेश दुबे, पं. रमेश दुबे पं. अनिल दुबे (पप्पू), पं. नीरज दुबे श्रीमति उमा अशोक चौथे श्रीमति उषा बाजपेयी श्रीमति सकुन्तला विजय त्रिपाठी श्रीमति खेहलता खम्परिया श्रीमति अर्चना उमेश शुक्ला श्रीमति रतन कुमारी मिश्रा श्रीमति बेबी रामसरोवर दुबे राजेश दुबे श्रीमति मिथलेश रमेश दुबे श्रीमति कविता अनिल दुबे श्रीमति संध्या नीरज दुबे श्रीमति रेशु नितिन दुबे श्रीमति सीमा बीरु चौथे श्रीमति योग्यता अभय बाजपेयी श्रीमति शिवानी आशु शुक्ला ओम त्रिपाठी, अन्विता, प्रज्ञा, मुनमुन, अनाया, सौमान्त, सात्थिक वेद, समस्त दुबे परिवार ने नगर के समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से श्रीमदभागवत कथा श्रवण कर पुण्यलाभ अर्जित करने की अपील की है।

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