1915 में बने आबकारी अधिनियम को बदलने की तैयारी में मध्य प्रदेश सरकार
भोपाल(YASHBHARAT.COM)। मध्य प्रदेश सरकार 111 वर्ष पुराने आबकारी अधिनियम में संशोधन की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री और वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वर्ष 1915 में बने आबकारी अधिनियम के जो प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों में अव्यावहारिक हो चुके हैं, उनमें समयानुकूल बदलाव किया जाएगा। इस संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित नई आबकारी नीति में न तो किसी शराब दुकान को बंद करने का प्रस्ताव है और न ही नई शराब दुकानें खोलने की योजना है। उल्लेखनीय है कि आबकारी नीति 2025-26 में प्रदेश के 17 धार्मिक नगरों में शराब दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया गया था, जिसके चलते इन नगरों की 47 शराब दुकानें बंद की गई थीं। नई नीति में पूर्व की तरह नर्मदा नदी के किनारे 5 किलोमीटर की परिधि में शराब दुकानें न खोलने का प्रावधान यथावत रखा जाएगा। साथ ही धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों से शराब दुकानों की न्यूनतम दूरी 100 मीटर निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव है। प्रदेश में वर्तमान में कुल 3,558 शराब दुकानें संचालित हैं, जो सभी कंपोजिट दुकानें हैं। मध्य प्रदेश में शराब दुकानों का आवंटन ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। आबकारी विभाग द्वारा अधिनियम में संशोधन के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम संशोधन प्रस्ताव तैयार कर विभाग को सौंपेगी। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा परीक्षण के बाद संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी के लिए मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) में प्रस्तुत किया जाएगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मप्र आबकारी अधिनियम वर्ष 1915 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बनाया गया था।