सौंतेली नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोपी सौंतेले पिता को आजीवन कारावास, डीएनए रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय पॉक्सो एक्ट की अदालत ने सुनाया फैसला

सौंतेली नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोपी सौंतेले पिता को आजीवन कारावास, डीएनए रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय पॉक्सो एक्ट की अदालत ने सुनाया फैसला

कटनी। सौतेली बेटी से दुष्कर्म के मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट की अदालत ने सौतेले पिता को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक महिला थाना के अपराध क्रमांक 40/2022 विशेष सत्र प्रकरण एससीएटीआर क्रमांक 75/2022 में विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट जिला द्वारा आरोपी (पीडि़ता का सौतेला पिता होने के कारण नाम और पता का उल्लेख नहीं किया जा रहा है) को धारा 376 (एबी) भादंवि, धारा 5 (एल) (एन) सहपठित धारा 6 पॉक्सो एक्ट में शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिये आजीवन कारावास एवं 1000-1000 रूपये के अर्थदण्ड, धारा 3 (2) (अ) एससी/एसटी एक्ट में आजीवन कारावास एवं 1000 रूपये के अर्थदण्ड एवं धारा 3(1) एससी/एसटी एक्ट में 02 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। उक्त प्रकरण में सशक्त पैरवी रामनरेश गिरी अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी विशेष लोक अभियोजक द्वारा की गई। मीडिया सेल प्रभारी सुरेन्द्र कुमार गर्ग द्वारा बताया गया कि अभियोक्त्री आयु लगभग 11 वर्ष 09 माह सातर्वी तक पढ़ी है। उसकी मां ने आरोपी से दूसरा विवाह किया है और अभियोक्त्री और उसकी बहन को लेकर बड़वारा में रहती है। अभियोक्त्री की मां जब अभियोक्त्री की नानी के घर इमलिया गई थी और अभियोक्त्री बड़वारा में अपने सौतेले पिता आरोपी के साथ थी। 27 अगस्त 2022 शनिवार को जब अभियोक्त्री की तबीयत ठीक न होने से वह सो रही थी। रात करीब 9 बजे उसके पिता आरोपी ने अभियोक्त्री के साथ जबरदस्ती गलत काम किया और जान से मारने की धमकी दी और उसके बाद रात में करीब 11:30 बजे फिर गलत काम किया। जब अभियोक्त्री की मां इतवार को लौटी तो अभियोक्त्री ने सारी बात अपनी मां को बतायी। तब अभियोक्त्री की मां अभियोक्त्री को लेकर बड़वारा अस्पताल ले गई, जहां नर्स को बताया, तब बड़वारा की पुलिस अस्पताल आई और एम्बुलंस से अभियोक्त्री को कटनी लेकर आये। अभियोक्त्री की मौखिक रिपोर्ट पर से आरक्षी केन्द्र महिला थाना कटनी में आरोपी सौंतेले पिता के विरुद्ध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान पीडि़ता, पीडिता की मां तथा अन्य साक्षियों के कथन लेख किए गए। विवेचना के दौरान पीडि़ता एवं पिता/आरोपी का रक्त नमूना प्रिजर्व कर डीएनए परीक्षण के लिये भेजा गया। विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अभियोक्त्री द्वारा अपने न्यायालयीन कथन में उक्त घटना आरोपी द्वारा कारित नहीं करना एवं आरोपी सौतेले पिता को पहचानने से भी इन्कार किया है। डीएनए रिपोर्ट से यह प्रमाणित हुआ कि अभियोक्त्री के पिता द्वारा ही अभियोक्त्री के साथ घटना कारित की गई है। उक्त वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर न्यायालय द्वारा अभियोक्त्री के सौतेले पिता को उक्त अपराध के लिये दोषी पाते हुये एवं अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्क से सहमत होते हुये आरोपी को धारा 376 (एबी) भादंवि, धारा 5 (एल) (एन) सहपठित धारा 6 पॉक्सो एक्ट में शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिये आजीवन कारावास एवं 1000-1000 रूपये के अर्थदण्ड, धारा 3 (2) (अ) एससी/एसटी एक्ट में आजीवन कारावास एवं 1000 रूपये के अर्थदण्ड एवं धारा 3(1) एससी/एसटी एक्ट में 02 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

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