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कटनी कोर्ट का फैसला: हत्या के प्रयास के दोषियों को सुनाई गई जेल की सजा

Supreme Court sets out object and purpose of Order VII Rule 11 of the Code of Civil Procedure1908

कटनी कोर्ट का फैसला: हत्या के प्रयास के दोषियों को सुनाई गई जेल की सज

कटनी: चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश एस.पी.एस. बुंदेला की अदालत ने थाना कोतवाली अंतर्गत हत्या के प्रयास के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अभियुक्त रितिक निषाद, अभिषेक उर्फ भालू चौरसिया और अनुराग उर्फ वासु चौरसिया को दोषी करार देते हुए कारावास की सजा सुनाई है।

क्या था मामला?
यह मामला थाना कोतवाली के अपराध क्रमांक 238/2024 से संबंधित है। पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा 294 (गाली-गलौज), 323 (मारपीट), 307 (हत्या का प्रयास) सहपठित धारा 34 और आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत मामला दर्ज किया था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नदीम जावेद खान के न्यायालय से मामला विचारण के लिए सत्र न्यायालय भेजा गया था, जहाँ अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक श्री के.के. तिवारी ने पैरवी की।

घटना का विवरण:
यह वारदात 27 मार्च 2024 को रात लगभग 9:30 बजे गांधी गंज, कटनी में हुई।
* विवाद की जड़: मुख्य अभियुक्त रितिक निषाद ने फरियादी साहिल निषाद से कुछ पैसे उधार लिए थे। जब साहिल ने पैसे वापस मांगे, तो रितिक ने उसे बात करने के बहाने ‘रावत गली’ बुलाया।
हमला साहिल अपने दोस्तों आशीष सोंधिया और सूजल रजक के साथ वहां पहुंचा। वहां रितिक निषाद, अभिषेक उर्फ भालू, अनुराग उर्फ वासु और एक नाबालिग पहले से मौजूद थे।
गाली-गलौज और जानलेवा हमला*: रितिक ने गाली देते हुए कहा, “तू मुझसे पैसा लेगा?” और जान से मारने की नीयत से साहिल के पेट में चाकू मार दिया। चाकू के वार से साहिल की आंतें बाहर निकल आईं
बीच-बचाव: जब साहिल का दोस्त आशीष उसे बचाने आया, तो अनुराग उर्फ वासु ने उसके सिर पर बीयर की बॉटल मारी और अभिषेक उर्फ भालू ने हाथ-घूंसों व कड़े से उसके साथ मारपीट की।
फरारी और उपचार: शोर मचने पर हमलावर मौके से भाग गए। घायल साहिल को तुरंत जिला अस्पताल कटनी ले जाया गया, जहाँ उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया गया।

कोर्ट का फैसला
दस्तावेजों के अनुसार, न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्तों को दोषी पाया। आदेश के मुख्य अंश इस प्रकार हैं
सजा का प्रावधान: दोषियों को उनके द्वारा किए गए अपराधों के लिए कठोर कारावास की सजा दी गई है।
जेल अवधि का समायोजन*: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अभियुक्तों द्वारा विचारण के दौरान जेल में बिताई गई पिछली अवधि को उनकी कुल सजा में समायोजित (Set-off) किया जाए।
नाबालिग का मामला: फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि इसी मामले से संबंधित एक ‘विधि का उल्लंघन करने वाले बालक’ (नाबालिग) का प्रकरण वर्तमान में सक्षम किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।

जब्त संपत्ति का निराकरण
न्यायालय ने मामले में जब्त की गई संपत्ति के निराकरण के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं। दोषियों के खिलाफ सजा वारंट तैयार कर उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।

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