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संयुक्त कर्मचारी मोर्चे ने विधायक को सौंपा मांगों से संबंधित ज्ञापन, मांगे पूरी न होने पर 7 फरवरी को आंदोलन की चेतावनी

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कटनी। मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संघ के प्रांतीय आह्वान पर मुख्यमंत्री एवं मुख्यसचिव के नाम 51 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन गतदिवस विधायक संदीप जायसवाल को सौंपा गया। ज्ञापन में प्रमुख मांगे कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा, लंबित 3 प्रतिशत डीए, लिपिक संवर्ग की वेतन संगति दूर करना, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पदनाम परिवर्तन कर ग्रेड पे 1300 के स्थान पर 1800 किया जाना, गृह भाड़ा भत्ता सातवें वेतनमान के अनुरूप दिया जाना, पदोन्नति शीघ्र प्रारंभ किया जाना, दैनिक वेतन भोगी स्थाई कर्मियो ंअंशकालीन को नियमित किया जाना, रसोईया, कोटवार, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता को कलेक्टर दर पर घोषित करना, अवकाश आकस्मिक निधि कर्मचारी को 300 दिवस के अर्जित अवकाश का लाभ दिया जाना, टैक्सी प्रथा बंद करना, सीपीसीटी परीक्षा की बाध्यता खत्म करना, आउटसोर्स प्रथा बंद कर नियमित पदों पर भर्ती किया जाना, समस्त प्रकार के भत्ते सातवें वेतनमान के अनुरूप दिया जाना, पुलिस आरक्षक को ग्रेड पे 1900 के स्थान पर 2400 दिया जाने सहित एवं अन्य मांगों के निराकरण हेतु ज्ञापन सौंपा गया। मोर्चा संस्थापक सरमन तिवारी, जिलाध्यक्ष इंजी आर के बत्रा, जिला सचिव हरप्रीत सिंह ग्रोवर, मध्य प्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष पूर्णेश उइके की नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष शिवकुमार सोलंकी, अजय गौतम, उप प्रांताध्यक्ष अनिल खंपरिया, महेंद्र तिवारी, सुनील मिश्रा, ए के मेहरा छात्रावास अधीक्षक संघ, अजय नामदेव विद्युत मंडल संघ, मार्तण्ड सिंह, निलेश पौराणिक, धर्मेंद्र राज, बाबूलाल अहिरवार, अनिल पांडे, कपिल मनहर, भागीरथ तिवारी, अध्यक्ष स्थाई कर्मी संघ बबलू चौधरी, भगत सिंह, अरविंद उपाध्याय, हंसराज बोरकर, कैलाश साहू, अजमुद्दीन शाह, हरीश बेन, शत्रुघन यादव, रतन ठाकुर, बलवीर सिंह, ज्योति चौधरी, ललिता वर्षा, खुशबू, आशा केवट, रीना, नीलम सहित मोर्चा में सम्मिलित जिले भर के मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड व गैर मान्यता प्राप्त अधिकारी कर्मचारी संगठनों ने न्यायोचित मांगों का समर्थन किया। अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने मांगों के निराकरण नहीं होने पर आंदोलन के तीसरे चरण में आगामी 7 फरवरी को प्रदेश भर में कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन आंदोलन का निर्णय लिया है। यदि इसके बाद भी निराकरण नहीं होता है तो आंदोलन के चौथे चरण में मध्य प्रदेश के समस्त कर्मचारी भोपाल में आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी मध्य प्रदेश शासन की होगी।

 

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