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वैदिक काल में क्रिस्टल थैरेपी से ही लोगों का इलाज किया जाता था। आइए जानें इसके उपाय

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वैदिक काल में क्रिस्टल थैरेपी से ही लोगों का इलाज किया जाता था। आइए जानें इसके उपाय आजकल हर किसी को जल्दी है। इसी का नतीजा है कि अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी होती है तो वह या तो ऐलोपैथी की ओर जाते हैं या होम्योपैथी की ओर कदम बढ़ाते हैं। जिसके चलते कभी कभी उन्हें इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो आयुर्वेद या फिर नेचुरल इलाज में अपना हाथ आजमाते हैं। क्रिस्टल थैरेपी वैकल्पिक चिकित्सा का एक ऐसा अंग है जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते होंगे। आपको बता दें कि वैदिक काल में क्रिस्टल थैरेपी से ही लोगों का इलाज किया जाता था। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक तो यह पूरी तरह से नेचुरल है और दूसरा यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर क्रिस्टल थैरेपी क्या है और इसके क्या फायदे हैं।

 *क्या है क्रिस्टल थैरेपी*

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क्रिस्टल थैरेपी जिसे क्रिस्टल हीलिंग भी कहते हैं, शारीरिक और मानसिक बीमारियों का इलाज करने का एक ऐसा प्रकार है जिसमें बिना दवा के व्यक्ति की बीमारी को दूर किया जाता है। इस थैरेपी के तहत अलग अलग तरह के पारदर्शी पत्थरों या ट्रांसपेरेंट क्रिस्टलों से इलाज किया जाता है। ये क्रिस्टल पृथ्वी में पाए जाते हैं यानि कि पूरी तरह से नेचुरल होते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि ये क्रिस्टल ऊर्जा और हीट कंडक्टर के अच्छे स्त्रोत हैं। इस थैरेपी का प्रयोग अक्सर बॉडी को रिलेक्स करने, स्ट्रेस और मानिसिक रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। हालांकि ये क्रिस्टल इतने शक्तिशाली होते हैं कि हर बीमारी की चिकित्सा करने में सक्षम हैं। इस थैरेपी में कभी कभी एक ही क्रिस्टल का प्रयोग किया जाता है और कभी अलग अलग क्रिस्टलों का प्रयोग होता है। क्रिस्टल को दर्द की जगहों पर, एक्यूपंक्चर बिंदुओं और मेरिडियन पर या सूक्ष्म ऊर्जा भंवरों के चक्र पर रखा जाता है, जिसमें लगभग एक घंटे का समय लगता है। जब इन क्रिस्टल को व्यक्ति के शरीर पर रखा जाता है तब हमारा शरीर इन क्रिस्टल में मौजूद रसायन और खनिज को अपनी ओर खींच लेता है। जिससे इसके सभी गुण हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं।

वैदिक काल में क्रिस्टल थैरेपी से ही लोगों का इलाज किया जाता था। आइए जानें इसके उपाय

 *क्रिस्टल थैरेपी के लाभ*

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क्रिस्टल थैरेपी वाकई में बहुत फायदेमंद होती है। देश के कोने कोने में कई ऐसी जगह हैं जहां सिर्फ इस थैरेपी से लोगों का इलाज किया जाता है। यही नहीं कई सेलेब्रिटी भी ऐसे हैं जो क्रिस्टल थैरेपी का सहारा लेते हैं। अगर इसके लाभ की बात करें तो वह कई हैं। क्रिस्टल थैरेपी का प्रयोग मुख्य रूप से स्ट्रेस, एंजाइटी, सिर दर्द, शारीरिक और मानसिक कमजोरी, शरीर का दर्द और ऐंठन, हाथ पैरों में जकड़न, नींद की कमी और याददाश्त कमजोर होने की स्थिति में किया जाता है और यह काफी कारगार भी होता है।

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कौन सा क्रिस्टल होता है सबसे ज्यादा फायदेमंद क्रिस्टल थैरेपी में कई तरह के पत्थरों का प्रयोग होता है। वैसे तो हर पत्थर की अपनी विशेषता होती है लेकिन फिर भी कुछ क्रिस्टल ऐसे भी होते हैं जिन्हें थैरेपी के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है। सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले पत्थरों में एमिथिस्ट, रोडोनाइट, ओपल और गुलाब क्वार्ट्ज शामिल हैं। एमिथिस्ट में ऐसी शक्तियां पाई जाती हैं जो आंतों और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं। ग्रीन एवेन्ट्यूरिन जैसे पत्थर, हृदय रोगों से बचाने का काम करते हैं, जबकि येलो टोपाज़ जैसे क्रिस्टल दिमागी ब्लॉकेज और डिप्रेशन के लिए प्रयोग किए जाते हैं। बता दें कि जब क्रिस्टल को शरीर पर रखा जाता है तो यह बहुत भारी लगते हैं। लेकिन जब व्यक्ति को पत्थरों का भार सामान्य महसूस होने लगे तो समझ जाना चाहिए कि इलाज हो गया है।

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