दिमाग खाने वाले अमीबा से 9 साल की बच्ची की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट; जानिए ब्रेन-ईटिंग अमीबा के लक्षण।
9 साल की बच्ची का दिमाग अमीबा ने खा लिया, जिससे बच्ची की मौत हो गई है। जी हां… केरल के कोझिकोड जिले में ब्रेन-ईटिंग अमीबा से 9 साल की बच्ची की मौत हो गई है। दो अन्य मरीज गंभीर हालत में इलाज करा रहे हैं, जिनमें से एक वेंटिलेटर पर है। ब्रेन-ईटिंग अमीबा से मौत से सरकार-स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पैर फूल गए हैं। केरल स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से ठहरे हुए पानी से बचने और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
A Man was just admitted in a hospital in Israel after he got infected by a Brain eating Amoeba.
The Amoeba , Naegleria fowleri can be found in water bodies, pools, warm springs etc.
It enters the body after contact with infected water eg swimming, passes through the nose,… pic.twitter.com/BI5e9RGlI8
— The_Bearded_Dr_Sina (@the_beardedsina) July 4, 2024
ब्रेन-ईटिंग अमीबा के लक्षण
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी इंसान से इंसान में नहीं फैलती। हालांकि इसकी मृत्यु दर काफी अधिक होती है। संक्रमण के लक्षण 5 से 10 दिन में सामने आते हैं। इनमें तेज सिरदर्द, बुखार, उल्टी, गर्दन मोड़ने में दिक्कत और रोशनी में देखने में परेशानी शामिल हैं। बच्चों में खाने की इच्छा कम होना, खेलने से बचना, याददाश्त कमजोर होना और दौरे जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने ठहरे हुए पानी से बचने की सलाह दी
कुओं और स्विमिंग पूल की साफ-सफाई स्वास्थ्यकर्मियों के मार्गदर्शन में नियमित रूप से करने को कहा गया है। जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके राजाराम ने कहा है कि लोगों को विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना जरूरी है, ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
पहला मामले भारत में कब सामने आया?
भारत में प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस का पहला मामला साल 1971 में सामने आया था। केरल में पहला मामला साल 2016 में आया था। 2016 से 2023 तक राज्य में केवल आठ मामले देखने को मिले। पिछले साल केरल में 36 पॉजिटिव मामले सामने आए और नौ मौतें हुईं। जुलाई 2024 तक भारत में दर्ज सभी मामलों में मरीज की मौत हो जाती थी। जुलाई 2024 में कोझिकोड जिले का एक 14 साल का लड़का इस बीमारी से बचने वाला पहला भारतीय बना। वह दुनिया में पीएएम से बचने वाला केवल 11वां शख्स था।
अब केरल में बढ़े हुए मामलों की बात करें तो एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के लिए जांच को भी कारण माना जा सकता है। इतना ही नहीं जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण भी इसके अन्य कारण हो सकते हैं। पिछले साल जब मामलों में बढ़ोतरी हुई तो राज्य ने अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस के मामलों के मैनेजमेंट के लिए एक एसओपी जारी की। दिमाग खाने वाले अमीबा से 9 साल की बच्ची की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट; जानिए ब्रेन-ईटिंग अमीबा के लक्षण
