GST Council का बड़ा फैसला: केवल 5% और 18% स्लैब, रोजमर्रा की चीजें सूखे मेवे और फल यानी बादाम, काजू पिस्ता, खजूर,प्रोसेस्ड फूड यानी पास्ता, नूडल्स, कॉर्नफ्लेक्स, फ्रूटेड राइस, बिस्किट, केक, पेस्ट्री हुईं सस्ती

GST Council का बड़ा फैसला: केवल 5% और 18% स्लैब, रोजमर्रा की चीजें सूखे मेवे और फल यानी बादाम, काजू पिस्ता, खजूर,प्रोसेस्ड फूड यानी पास्ता, नूडल्स, कॉर्नफ्लेक्स, फ्रूटेड राइस, बिस्किट, केक, पेस्ट्री हुईं सस्ती

GST Council का बड़ा फैसला: केवल 5% और 18% स्लैब, रोजमर्रा की चीजें सूखे मेवे और फल यानी बादाम, काजू पिस्ता, खजूर,प्रोसेस्ड फूड यानी पास्ता, नूडल्स, कॉर्नफ्लेक्स, फ्रूटेड राइस, बिस्किट, केक, पेस्ट्री हुईं सस्ती। जीएसटी परिषद की 54 वीं बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है. बैठक में तय हुआ है कि अब जीसटी में 2 स्लैब ही होंगे. 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत स्लैब को हटा दिया गया है, अब सिर्फ 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत का स्लैब रहेगा

 

GST Council का बड़ा फैसला: केवल 5% और 18% स्लैब, रोजमर्रा की चीजें सूखे मेवे और फल यानी बादाम, काजू पिस्ता, खजूर,प्रोसेस्ड फूड यानी पास्ता, नूडल्स, कॉर्नफ्लेक्स, फ्रूटेड राइस, बिस्किट, केक, पेस्ट्री हुईं सस्ती

जीएसटी काउंसिल की बैठक में बड़ा रिफॉर्म किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि अब जीएसटी के सिर्फ 2 स्लैब ही लागू होंगे. इनमें पहला 5% तथा दूसरा 18 प्रतिशत. इसके अलावा एक स्पेशल स्लैब भी होगा. 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की स्लैब को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. यह फैसला 22 सितंबर से लागू होगा.

जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में बुधवार देर शाम ये अहम फैसला लिया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कॉमन मैन की आवश्यक वस्तुओं पर अब 12 और 18 प्रतिशत नहीं बल्कि महज 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगी. इसके अलावा अल्ट्रा हाई टेमरेंचर मिल्क, छेना, पनीर, ब्रेड पर कोई जीएसटी नहीं लगेगी. इसके अलावा एसी, वाशिंंग मशीन, 38 इंच से बड़ी टीवी, छोटी कारों आदि पर अब 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगी, जबकि पहले इन पर 28 प्रतिशत जीएसटी वसूली जाती थी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में अगली पीढ़ी के सुधारों की दशा तय की थी. पीएम ने जो नेक्स्ट जनरेशन रिफॉर्म की जो बात कही थी, हमने उसी दिशा में काम किया है. रेट रेसनालाइजेशन में सभी राज्यों में वित्त मंत्रियों ने सहयोग किया और हमने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया है.

क्या सस्ता और क्या महंगा?

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