Site icon Yashbharat.com

Good News: SBI ने 40 करोड़ ग्राहकों को घर बैठे दी यह बड़ी सुविधा

Sbi bank

Sbi bank

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के कस्टमर्स के लिए ये अच्छी खबर है. कस्टमर्स के लिए खाते में नॉमिनी का नाम जुड़वाना मुश्किल काम होता है, जिसे बैंक ने अब काफी आसान कर दिया है. एसबीआई के एक ट्वीट के मुताबिक, कस्टमर्स अब खाते में नॉमिनी का नाम जुड़वाने के लिए बैंक की वेबसाइट www.onlinesbi.com पर विजिट कर सकते हैं और नॉमिनी का नाम रजिस्टर कर सकते हैं. यह काम ब्रांच में जाकर भी कराया जा सकता है.

खाते में नॉमिनी का नाम जुड़वाना काफी अहम होता है. दुर्भाग्यवश अगर कोई घटना हो जाए तो खाते में जमा राशि नॉमिनी को ही दी जाती है. अगर नॉमिनी का नाम न हो तो जमा राशि पाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़ते हैं और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद ही पैसा मिलता है.

इसलिए बैंक में सेविंग्स अकाउंट खोलने, म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने या बीमा पॉलिसी लेते समय इस बात का खयाल जरूर रखें और नॉमिनी का नाम जरूर जुड़वाएं.

किसे बना सकते हैं नॉमिनी

खाते में नॉमिनी के तौर पर आप पति/पत्नी का नाम दर्ज करा सकते हैं. आप चाहें तो अपने बच्चे, माता-पिता, परिवार के किसी सदस्य या फिर खास मित्र को भी नॉमिनी बना सकते हैं. प्रॉपर्टी या जमा राशि के मालिक की मृत्यु होने पर नॉमिनी को ही उसका फायदा मिलता है. अगर आपने अकाउंट में नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं कराया तो यह पैसा फंस सकता है. इसे पाने के लिए लंबे दिनों तक कानूनी दांवपेच में भी फंस सकते हैं. इससे बचने के लिए जरूरी है कि जब भी खाता खुलवाएं, उसमें नॉमिनी का नाम जरूर दर्ज कराएं.

बीमा पॉलिसी लेते समय किसी नॉमिनी का नाम देना जरूरी होता है. आप चाहें तो एक से ज्यादा नॉमिनी का नाम भी दे सकते हैं. जानाकरों के मुताबिक, बीमा पॉलिसी में अपने कानूनी वारिस को ही नॉमिनी बनाना ज्यादा अच्छा होता है.

बैंक खाते में आप माता-पिता, बच्चे, रिश्तेदार या दोस्त को भी नॉमिनी बना सकते हैं. बैंक खाते में जरूरी नहीं कि आप अपना नॉमिनी किसी कानूनी वारिस को ही बनाएं. हालांकि खाते में आप किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बना सकते हैं. खाताधारक की मृत्यु होने पर जॉइंट अकाउंट की स्थिति में जमा राशि दूसरे अकाउंट होल्डर को उसके बाद नॉमिनी को मिलती है.

बदल सकते हैं नॉमिनी का नाम

यहां ध्यान रखना जरूरी है कि नॉमिनी अगर नाबालिग हो तो उसके लिए किसी गार्जियन को नियुक्त करना जरूरी होता है और इसकी जानकारी बैंक या पॉलिसी आदि में देनी होती है. आप चाहें तो एक से ज्यादा लोगों को नॉमिनी बना सकते हैं, इसमें कोई नियम का अड़चन नहीं है. अकाउंट होल्डर को यह सुविधा मिलती है कि वह नॉमिनी का नाम बदल सकता है.

यह बात याद रखना चाहिए कि नॉमिनी हमेशा संपत्ति का हकदार नहीं होता बल्कि वह संपत्ति का केयरटेकर होता है. बाद में वह संपत्ति या जमा राशि अकाउंट होल्डर के कानूनी वारिस को सौंपनी होती है. नॉमिनी बनाने पर भी वसीयत बनाना जरूरी है. अगर नॉमिनी है पर वसियत नहीं है तो संपत्ति का बंटवारा कानून के हिसाब से होगा और इसमें वक्त लग सकता है.

एसबीआई ने नॉमिनी के नाम को लेकर काम आसान कर दिया है क्योंकि पहले यह सुविधा ऑनलाइन नहीं मिल रही थी. अब लोग ब्रांच नहीं जाना चाहें तो वेबसाइट के जरिये भी यह काम आसानी से कर सकते हैं. एसबीआई ने एक ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है. ग्राहकों को बताया है कि अकाउंट होल्डर ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर नॉमिनी का नाम जोड़ सकते हैं, इसके लिए ब्रांच जाने की जरूरत नहीं होगी.

Exit mobile version