Site icon Yashbharat.com

Galsuaa Ki Bimari : मम्स वायरस का अटैक, बच्चे, बुजुर्ग युवा सभी परेशान

galsuaa

Galsuaa Ki Bimari : मम्स वायरस का अटैक, बच्चे, बुजुर्ग युवा सभी परेशान। मौसम बदलने के साथ ही मम्स (गलसुआ) के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। रोजाना 15 से 20 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सक मरीजों का इलाज कर आराम करने की सलाह दे रहे हैं। तेज धूप, सुबह-शाम ठंड पड़ने के कारण मम्स का वायरस अटैक कर रहा है। नतीजतन जिला चिकित्सालय से लेकर जेएएच की ओपीडी में मम्स वायरस की चपेट में आए मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। बच्चे, बुजुर्ग, युवा सभी आयुवर्ग के मरीज मम्स के शिकार हो रहे हैं। सभी को दवा देने के साथ आराम करने को कहा जा रहा है।

जिला अस्पताल मुरार के नाक, कान गला रोग विभाग की ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं कमलाराजा अस्पताल में बाल रोग विभाग की ओपीडी में मम्स के शिकार बच्चों की संख्या ज्यादा है। रोजाना चार से पांच बच्चे मम्स से पीड़ित मिल रहे हैं। इस वजह से कुछ बच्चों में पेट दर्द, उल्टी और दिमाग में परेशानी की समस्या भी सामने आ रही है। इससे चिकित्सक परेशान हैं। बच्चों में वायरस के पनपने का कारण चिकित्सक मम्स का टीका न लगना बता रहे हैं।

जिला अस्पताल के इएनटी विशेषज्ञ डा. सुनील शर्मा ने बताया कि मम्स के कारण गले में सूजन आ जाती है, जिस कारण मरीज को भोजन करने, पानी पीने आदि में दिक्कत होती है। अक्सर सर्दियों के मौसम में यह बीमारी देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में एक बार यह बीमारी जरूर होती है। इस बीमारी से घबराने की कतई जरूरत नहीं है। मरीज को गले में सूजन होने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। साथ ही दवा लेकर आराम करना चाहिए। अमूमन तीन से चार दिनों में यह बीमारी ठीक हो जाती है।

मम्स वायरस क्या है

मम्स वायरस एक संक्रामक रोग है। यह वायरस के कारण होता है। यह लार, नाक के संक्रमण और करीबी व्यक्तिगत लक्षणों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह स्थिति मुख्य रूप से लार ग्रंथियों को प्रभावित करती है, जिन्हें पैरोटिड ग्रंथियां कहा जाता है।

दो से तीन सप्ताह में दिखाई देते हैं लक्षण

मम्स के लक्षण दो से तीन सप्ताह में दिखाई देते हैं। इनमें सिरदर्द, थकान, भूख में कमी, बुखार, लार ग्रंथियों में सूजन के कारण गालों या जबड़े का बढ़ना चबाने या निगलने में परेशानी होना।

ओपीडी में मम्स से पीड़ित बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। इनमें कुछ बच्चे ऐसे भी है जिनको इससे पेट दर्द, उल्टी के साथ अन्य परेशानी हो रही है। बच्चों का उपचार कर स्वजन को सलाह दी जा रही है कि उनको आराम करने दें।

डा. रवि अम्बे, बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ, जेएएच

Exit mobile version