तेजाब हमला पीड़ितों को रेल किराए में छूट: सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- पॉलिसी बनाने में दिव्यांग विभाग की भागीदारी हो जरूरी

तेजाब हमला पीड़ितों को रेल किराए में छूट: सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- पॉलिसी बनाने में दिव्यांग विभाग की भागीदारी हो जरूरी

नई दिल्ली, बुधवार: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तेजाब हमला पीड़ितों (Acid Attack Victims) को ट्रेन यात्रा में रियायत देने के मामले पर अहम सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD) को इन पीड़ितों के लिए रियायती पॉलिसी तैयार करने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित अपने इलाज के लिए बेहतर सुविधाओं वाले अस्पतालों तक आसानी से सफर कर सकें।

केंद्र सरकार ने तैयार किया ड्राफ्ट

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि केंद्र सरकार ने याचिकाकर्ता NGO ‘अतिजीवन सोसाइटी’ और अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद नीति का एक मसौदा (Draft Policy) तैयार कर लिया है।

सीजेआई सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि अंतिम नीति तैयार करने के चरण में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन आने वाले दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

रियायत देने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है सरकार

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार तेजाब हमला पीड़ितों को ट्रेन के किराए में रियायत देने की पॉलिसी बनाने पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत है। इससे पहले, 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने रेल मंत्रालय से इस मामले में उदारतापूर्वक रियायत देने पर विचार करने को कहा था। अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे को 6 हफ्ते के भीतर पॉलिसी का मसौदा रिकॉर्ड में दाखिल करने का निर्देश दिया था।

‘मरीज कैटेगरी’ के तहत मिल सकती है सुविधा

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) अर्चना पाठक दवे ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार वर्तमान में इस सुविधा को ‘मरीज कैटेगरी’ (Patient Category) के तहत देने का प्रस्ताव कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को पीड़ितों को दिव्यांगजन की एक अलग श्रेणी में रखने को लेकर कुछ आपत्तियां हैं।

सरकार का तर्क है कि यदि उन्हें वर्तमान दिव्यांग कैटेगरी में रखा जाता है, तो उस श्रेणी के कई अन्य लोगों को वर्तमान में रेलवे में रियायत नहीं मिलती है। केंद्र सरकार की इस दलील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।

साइड नोट: प्राइवेट अस्पतालों पर भी सख्त हुई कोर्ट

इसी दौरान एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं की कीमत 10 गुना बढ़ाने पर गहरी नाराजगी जताई। प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा, “यह तो लूट है।”

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