जशपुर के सुदूर गांव से एशियन गेम्स के पोडियम तक: जानिए धावक अनिमेष कुजूर के संघर्ष, राष्ट्रीय रिकॉर्ड और कांस्य पदक की प्रेरक कहानी

जशपुर के सुदूर गांव से एशियन गेम्स के पोडियम तक: जानिए धावक अनिमेष कुजूर के संघर्ष, राष्ट्रीय रिकॉर्ड और कांस्य पदक की प्रेरक कहानी

रायपुर: जब हौसले बुलंद हों और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो अभावों की पगडंडियां भी अंतरराष्ट्रीय मंच का रास्ता बन जाती हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सुदूर गांव घुइतांगर से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचे युवा एथलीट अनिमेष कुजूर की सफलता संघर्ष, अनुशासन और अटूट विश्वास की एक अद्वितीय मिसाल है।

एशियन गेम्स में रचा इतिहास: ब्रॉन्ज मेडल के साथ तोड़ा नेशनल रिकॉर्ड

सीमित संसाधनों के बावजूद अनिमेष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया। एशियन गेम्स में भारतीय टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया:

फिसलने के बाद भी नहीं खोया धैर्य: सेमीफाइनल में दिखाया जज्बा

अनिमेष की यह राह आसान नहीं थी। सेमीफाइनल हीट के दौरान बारिश से गीले ट्रैक पर बैटन बदलते समय उनका पैर अचानक फिसल गया था। किसी भी एथलीट के लिए यह मानसिक दबाव का क्षण हो सकता था, लेकिन सैनिक स्कूल के अनुशासन में पले-बढ़े अनिमेष ने तुरंत खुद को संभाला, फिर से रफ्तार पकड़ी और टीम को फाइनल का टिकट दिलाया।

सैनिक स्कूल से स्प्रिंट ट्रैक तक का सफर

लंबाई को बनाया ताकत और राष्ट्रीय स्तर पर जमाई धाक

1.88 मीटर लंबे अनिमेष के लिए शुरुआत में बॉडी फ्लेक्सिबिलिटी और रनिंग तकनीक एक चुनौती थी। हालांकि, ओडिशा स्थित रिलायंस फाउंडेशन एथलेटिक्स हाई परफॉरमेंस सेंटर में कोच मार्टिन ओवेंस की देखरेख में उन्होंने अपनी तकनीक में सुधार किया।

प्रमुख राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां:

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