भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक प्रोटोकॉल: दोनों देशों ने शेयर की कैदियों की लिस्ट; भारत ने कहा- ‘सजा पूरी कर चुके 188 भारतीयों को तुरंत रिहा करे इस्लामाबाद’

भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक प्रोटोकॉल: दोनों देशों ने शेयर की कैदियों की लिस्ट; भारत ने कहा- 'सजा पूरी कर चुके 188 भारतीयों को तुरंत रिहा करे इस्लामाबाद'

भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक प्रोटोकॉल: दोनों देशों ने शेयर की कैदियों की लिस्ट; भारत ने कहा- ‘सजा पूरी कर चुके 188 भारतीयों को तुरंत रिहा करे इस्लामाबाद’

नई दिल्ली/इस्लामाबाद। सीमाओं पर जारी तनाव के बीच भारत और पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने-अपने स्थापित राजनयिक नियमों (Diplomatic Protocols) का पालन किया है। दोनों पड़ोसी देशों ने अपनी-अपनी जेलों और हिरासत में बंद एक-दूसरे के नागरिकों व मछुआरों की नई लिस्ट आधिकारिक तौर पर साझा की है। नई दिल्ली और इस्लामाबाद में तय राजनयिक चैनलों के माध्यम से इस द्विपक्षीय डेटा का आदान-प्रदान किया गया। यह प्रक्रिया मई 2008 में दोनों देशों के बीच हुए ‘कॉन्सुलर एक्सेस (राजनयिक पहुंच) समझौते’ के तहत हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को अनिवार्य रूप से पूरी की जाती है।

भारत की हिरासत में 439 पाकिस्तानी नागरिक

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत ने अपनी हिरासत में बंद उन 439 लोगों की विस्तृत सूची पाकिस्तान को सौंपी है, जिनके पाकिस्तानी नागरिक होने के दस्तावेजी सबूत हैं या जिनके पाकिस्तानी मूल के होने का गहरा संदेह है।

भारत ने उठाया 188 कैदियों का मुद्दा: सुरक्षा और भलाई की मांगी गारंटी

भले ही यह लिस्ट साझा करना एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इस बार भारत सरकार ने इस्लामाबाद के सामने अपनी बात बेहद मजबूती से रखी है। नई दिल्ली ने पाकिस्तान की जेलों में बंद लापता भारतीय रक्षा कर्मियों, आम नागरिकों और मछुआरों को जल्द से जल्द रिहा करने और उनकी वतन वापसी की अपनी पुरानी मांग को कड़े शब्दों में दोहराया।भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक प्रोटोकॉल: दोनों देशों ने शेयर की कैदियों की लिस्ट; भारत ने कहा- ‘सजा पूरी कर चुके 188 भारतीयों को तुरंत रिहा करे इस्लामाबाद’

भारतीय विदेश मंत्रालय की मुख्य मांगें:

क्या है 2008 का कॉन्सुलर एक्सेस समझौता?

मई 2008 में भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इसके तहत दोनों देशों को साल में दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई) एक-दूसरे की हिरासत में बंद कैदियों की स्थिति और उनकी संख्या की साफ-सुथरी जानकारी साझा करनी होती है। इसका मुख्य उद्देश्य अनजाने में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा पार करने वाले गरीब मछुआरों और आम नागरिकों को मानवीय आधार पर कानूनी मदद पहुंचाना और उनकी रिहाई का रास्ता साफ करना है।

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