संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर सनसनी: तिब्बती शख्स ने खुद को आग लगाकर दी जान, हाथ में था झंडा और ‘CHINA OUT OF TIBET’ का नारा
न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक 42 वर्षीय तिब्बती व्यक्ति ने चीनी कब्जे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए सरेआम आत्मदाह (खुद को आग लगा ली) कर लिया। इस दर्दनाक घटना में उस शख्स की मौत हो गई है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आत्मदाह करने वाले व्यक्ति की पहचान लोब्गा रंगजेन के रूप में हुई है, जो पिछले लगभग दो दशकों से अमेरिका में रह रहा था।संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर सनसनी: तिब्बती शख्स ने खुद को आग लगाकर दी जान, हाथ में था झंडा और ‘CHINA OUT OF TIBET’ का नारा
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शाम 7 बजे दहक उठा मैनहट्टन, 15 सेकंड में बुझाई आग पर नहीं बची जान
यह खौफनाक घटना गुरुवार शाम करीब 7 बजे मैनहट्टन के ईस्ट 43वीं स्ट्रीट और फर्स्ट एवेन्यू (संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के ठीक बाहर) के पास हुई। चश्मदीदों के मुताबिक, लोब्गा रंगजेन ने तिब्बती झंडा हाथ में लेकर खुद पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़का और आग लगा ली।
जैसे ही उसके शरीर से आग की लपटें उठीं, आस-पास से गुजर रहे वाहनों ने घबराहट में हॉर्न बजाना शुरू कर दिया। कुछ ही सेकंड में वह जमीन पर गिर पड़ा। वहां मौजूद दो इमरजेंसी वर्कर्स ने मुस्तैदी दिखाते हुए महज 15 सेकंड के भीतर ‘फायर एक्सटिंग्विशर’ (अग्निशामक यंत्र) से आग को बुझा दिया, लेकिन तब तक वह बुरी तरह झुलस चुका था। उसे तुरंत बेलेव्यू अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटनास्थल पर मिला ‘CHINA OUT OF TIBET’ का पर्चा
वारदात के बाद न्यूयॉर्क पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया। घटनास्थल पर एक घंटे बाद भी तिब्बत का झंडा पड़ा हुआ था। जांच के दौरान पुलिसकर्मियों को मृतक के पास से एक पर्चा मिला, जिस पर साफ अक्षरों में लिखा था— ‘CHINA OUT OF TIBET’ (चीन तिब्बत से बाहर जाओ)। यह नारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ‘फ्री तिब्बत कैंपेन’ (Free Tibet Campaign) का मुख्य हिस्सा है।
पिछले 17 सालों में 150 से अधिक तिब्बती कर चुके हैं आत्मदाह
‘फ्री तिब्बत कैंपेन’ ग्रुप के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2009 से लेकर अब तक तिब्बत के भीतर और बाहर करीब 150 से अधिक लोग चीनी दमन और अवैध कब्जे के खिलाफ आत्मदाह कर अपनी जान दे चुके हैं। प्रदर्शनकारी अक्सर आग लगाने के दौरान “दलाई लामा अमर रहें, तिब्बत को आजाद करो, पंचेन लामा को रिहा करो और तिब्बत में मानवाधिकार बहाल करो” जैसे नारे लगाते हैं।
चीन सरकार इस आंदोलन को दबाने के लिए तिब्बत के भीतर दमनकारी नीतियां अपनाती है। प्रदर्शनकारियों की मदद करने या अंतरराष्ट्रीय मीडिया को इसकी जानकारी साझा करने वालों को चीन में सख्त से सख्त सजा (उम्रकैद या मौत) दी जाती है। संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर सनसनी: तिब्बती शख्स ने खुद को आग लगाकर दी जान, हाथ में था झंडा और ‘CHINA OUT OF TIBET’ का नारा
1951 से शुरू हुआ था तिब्बत का दर्द
इतिहास की बात करें तो साल 1951 से पहले तिब्बत में एक स्वतंत्र और वास्तविक स्वायत्त प्रशासनिक व्यवस्था चलती थी। लेकिन 1951 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के दबाव में एक विवादित ’17-सूत्रीय
