अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: चंपत राय और अनिल मिश्रा की ‘हायरिंग’ पर उठे सवाल; बिना आई-कार्ड गिने जा रहे थे करोड़ों रुपये, ज्वैलरी का कोई हिसाब नहीं

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: चंपत राय और अनिल मिश्रा की 'हायरिंग' पर उठे सवाल; बिना आई-कार्ड गिने जा रहे थे करोड़ों रुपये, ज्वैलरी का कोई हिसाब नहीं

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: चंपत राय और अनिल मिश्रा की ‘हायरिंग’ पर उठे सवाल; बिना आई-कार्ड गिने जा रहे थे करोड़ों रुपये, ज्वैलरी का कोई हिसाब नहीं

 अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे में हुई चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले और हैरान कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे मामले में मंदिर ट्रस्ट की सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था की पोल खुल गई है। मामले की तह तक जाते हुए ‘इंडिया टीवी’ के हाथ कैश काउंटिंग (नोटों की गिनती) के लिए मार्च 2025 में रखे गए 10 नए लड़कों की सूची और ड्यूटी चार्ट लगा है, जिसने इस महा-चोरी के पीछे की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है।

बिना आई-कार्ड एंट्री, संघ और वीएचपी कनेक्शन

जांच में सामने आया है कि श्री राम जन्मभूमि तीरथ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ट्रस्टी अनिल मिश्रा को कैश काउंटिंग और स्टाफ रखने के लिए असीमित अधिकार (पावर) दे रखे थे।

हैरानी की बात यह है कि ये सभी लड़के आरएसएस (संघ) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े हुए थे। शुरुआत में सुरक्षा को ताक पर रखकर इन लड़कों के आई-कार्ड तक नहीं बनाए गए थे। वे केवल एक ‘ड्यूटी शीट’ दिखाकर अति-सुरक्षित मंदिर परिसर के भीतर दाखिल हो जाते थे। इन सभी को 18,000 रुपये प्रति माह वेतन पर रखा गया था।

पुलिस चौकी में चल रहा था दूसरा काउंटिंग सेंटर

कुंभ मेले के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे रामलला का चढ़ावा कई गुना बढ़ गया। इस दबाव को संभालने के लिए परिसर के भीतर दो काउंटिंग सेंटर बनाए गए:

  1. पहला सेंटर: मंदिर परिसर के भीतर PFC (पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर) बिल्डिंग के बेसमेंट में, जहाँ मेन मॉनिटरिंग रूम और एसबीआई (SBI) का काउंटर है।

  2. दूसरा सेंटर: परिसर के भीतर ही स्थित पुलिस चौकी का कमरा।

इन नए लड़कों (अनुकल्प, अविनाश, करुणेश, लवकुश, मनीष यादव और रमाशंकर) की ड्यूटी पुलिस चौकी वाले काउंटिंग रूम में नोट छांटने, गड्डियां बनाने और मशीन से गिनने में लगी थी।

कैमरे तो थे, पर देखने वाला कोई नहीं था

खुलासे के मुताबिक, मंदिर में चढ़ावा चोरी के लिए लापरवाही ने पूरी गुंजाइश छोड़ रखी थी। पुलिस चौकी वाले जिस कमरे में नोट गिने जा रहे थे, कैमरे और मॉनिटर की स्क्रीन भी उसी कमरे में लगी थी। मॉनिटरिंग रूम में जिन 2-3 लोगों की ड्यूटी सुरक्षा और नजर रखने के लिए लगाई गई थी, वे अक्सर बाहर ही घूमते रहते थे।

हद तो तब हो गई, जब यह सामने आया कि मंदिर में आने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और ज्वैलरी का कभी कोई पुख्ता हिसाब-किताब ही नहीं रखा गया, जिससे चोरी करना बेहद आसान हो गया। टिन्नू यादव नाम का व्यक्ति मंदिर के सर्वराकार के रूप में काम कर रहा था और वहां उसी की मनमानी चलती थी।

जब चोरी की शिकायत हुई, तो इंचार्ज बोले- “प्रभु देख रहे हैं, हमारे घर से क्या जा रहा है”

इस पूरे मामले का सबसे विचलित करने वाला पहलू यह है कि इस चोरी की भनक फरवरी में ही लग गई थी। काउंटिंग टीम के ही एक ईमानदार सदस्य ने जब इसकी शिकायत नोट गिनती के मुख्य इंचार्ज और रिटायर्ड बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव (जो अब खुद आरोपी हैं) से की, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था।

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आरोपी इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव ने शिकायतकर्ता से कहा था: “प्रभु देख ही रहे हैं, कौन सा हमारे-आपके घर से जा रहा है।”

बक्से से कैश निकलवाने से लेकर उसे एसबीआई (SBI) को हैंडओवर करने तक की पूरी कमान सुभाष श्रीवास्तव के पास ही थी। फिलहाल इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस हर एक कड़ाई से पूछताछ कर रही है और आने वाले दिनों में कुछ बड़े चेहरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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