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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खुशखबरी: FY27 तक 50 अरब डॉलर के सरप्लस में रहेगा ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’, SBI रिसर्च की रिपोर्ट में दावा

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खुशखबरी: FY27 तक 50 अरब डॉलर के सरप्लस में रहेगा ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’, SBI रिसर्च की रिपोर्ट में दावा

नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से देशवासियों के लिए एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाली खबर सामने आई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) तक भारत का ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’ (BoP) 50 अरब डॉलर के शानदार सरप्लस (बचत) में रहने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश से बाहर जाने वाले पैसे की तुलना में भारत के पास विदेशी मुद्रा का आगमन काफी अधिक हो रहा है।

इस मजबूत स्थिति के चलते देश का चालू खाता घाटा (CAD) कुल जीडीपी (GDP) के महज 1 प्रतिशत तक सीमित रहेगा, जिससे लंबी अवधि में महंगाई पर प्रभावी लगाम कसने में मदद मिलेगी।

RBI की FCNR(B) योजना रही पूरी तरह सफल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए शुरू की गई FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम के अभूतपूर्व परिणाम देखने को मिले हैं:

  • 85 अरब डॉलर का संभावित कलेक्शन: इस योजना के जरिए अब तक देश में 57 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आ चुकी है। रिपोर्ट का अनुमान है कि अगस्त के बाकी दिनों में 25 से 30 अरब डॉलर का निवेश और आ सकता है, जिससे कुल आंकड़ा 85 अरब डॉलर के करीब पहुंच जाएगा।

  • मजबूत विदेशी निवेश: हाल ही में RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने पुष्टि की थी कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का प्रवाह बेहद मजबूत है।

 विदेशी मुद्रा प्रबंधन की लागत न के बराबर

बाजार में RBI की स्वैप सुविधा की लागत को लेकर चिंताएं थीं, जिन्हें SBI रिसर्च ने पूरी तरह खारिज कर दिया है:

  • विशाल खजाने का 1.45% खर्च: पांच वर्षों की कुल हेजिंग लागत लगभग 10.5 अरब डॉलर होगी, जो भारत के लगभग 700 अरब डॉलर के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का मात्र 1.45 प्रतिशत है। यानी मिलने वाले आर्थिक फायदों के सामने यह खर्च न के बराबर है।

 रुपये को मिली ताकत और सोने में बढ़ा निवेश

वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय मुद्रा और विदेशी खजाने को सुरक्षित रखने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं:

  • रुपये में मजबूती: FCNR(B) उपायों के बाद से रुपये में मजबूती देखी गई है। SBI रिसर्च के अनुसार अगस्त के अंत तक रुपया डॉलर के मुकाबले 95 से 95.5 के स्तर पर स्थिर हो सकता है।

  • कच्चे तेल का खतरा और सोने का ढाल: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल के 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने की आशंका बनी हुई है। इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए RBI ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो 7 अगस्त तक 15.38 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बनी हुई है।

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