जबलपुर: निजी अस्पतालों के पंजीयन में अनियमितताओं पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी ताजा रिपोर्ट

जबलपुर: निजी अस्पतालों के पंजीयन में अनियमितताओं पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी ताजा रिपोर्ट
कानूनी / मध्य प्रदेश डेस्क। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शहर के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन (Registration) में बरती जा रही कथित अनियमितताओं के मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। दायर पांच जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को स्थिति स्पष्ट करने और ताजा रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ (Division Bench) ने राज्य सरकार के अनुरोध पर 4 दिनों का समय दिया है। अब इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।जबलपुर: निजी अस्पतालों के पंजीयन में अनियमितताओं पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी ताजा रिपोर्ट
बिना फायर सेफ्टी व नगर निगम NOC के बांटे जा रहे लाइसेंस
‘लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ व अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं में आरटीआई (RTI) से प्राप्त चौंकाने वाली जानकारी का हवाला दिया गया है:
नियमों की अनदेखी: आरोप है कि बिना अनिवार्य फायर सेफ्टी (Fire Safety) और नगर निगम की एनओसी (NOC) के भी नए निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।
160 निजी अस्पताल संचालित: जबलपुर शहर में वर्तमान में लगभग 160 निजी अस्पताल व नर्सिंग होम चल रहे हैं।
फर्जीवाड़े की आशंका: आरटीआई आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 63 अस्पतालों का पंजीयन वर्ष 2019 से 2021 के दौरान किया गया था, जिनमें से कई बिना आवश्यक सुरक्षा और नगरीय अनुमतियों के संचालित हो रहे हैं।
अस्पतालों की सुरक्षा पर उठे सवाल
याचिकाओं में मांग की गई है कि फायर और नगर निगम एनओसी के बिना संचालित हो रहे सभी अस्पतालों का पंजीयन तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और स्वास्थ्य विभाग के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि किसी बड़े हादसे से मरीजों की जान को बचाया जा सके।







