बांकीपुर उपचुनाव परिणाम 2026: जन सुराज का बड़ा धमाका! प्रशांत किशोर ने बीजेपी के नीरज सिन्हा को चटाई धूल
Bankipur Bypoll Result 2026: बांकीपुर में प्रशांत किशोर का बड़ा धमाका- BJP का 36 साल पुराना गढ़ ढहा, जन सुराज 18,953 वोटों से जीती
बांकीपुर उपचुनाव LIVE: BJP के गढ़ में प्रशांत किशोर का बड़ा उलटफेर, 15वें राउंड के बाद 8,202 वोटों से आगे
बांकीपुर उपचुनाव परिणाम 2026: जन सुराज का बड़ा धमाका! प्रशांत किशोर ने बीजेपी के नीरज सिन्हा को चटाई धूल
पटना/बांकीपुर: बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव नतीजों में बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 18,953 वोटों के भारी अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस मुकाबले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) उम्मीदवार रेस्त्रां-राजनीति के बीच तीसरे स्थान पर खिसक गई है।
वर्ष 1990 से ही बीजेपी का अभेद्य किला मानी जाने वाली इस शहरी सीट पर जन सुराज की इस धमाकेदार जीत ने बिहार की राजनीति में नए समीकरण स्थापित कर दिए हैं।
बांकीपुर उपचुनाव परिणाम: 5 मुख्य बातें
18,953 वोटों से जीत: प्रशांत किशोर ने शुरुआती दौर से ही बढ़त बनाए रखी और अंततः बीजेपी उम्मीदवार नीरज सिन्हा को बड़े अंतर से शिकस्त दी।
बीजेपी का किला ढहा: 1990 (तत्कालीन पटना पश्चिम सीट) के बाद से लगातार बीजेपी इस क्षेत्र में अजेय रही थी, लेकिन जन सुराज ने इस दबदबे को समाप्त कर दिया।
RJD तीसरे नंबर पर पिछड़ी: आरजेडी प्रत्याशी रेखा कुमारी मुख्य मुकाबले से बाहर होकर तीसरे पायदान पर खिसक गईं।
क्यों हुआ था उपचुनाव? यह सीट बीजेपी नेता नितिन नवीन के भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने के बाद खाली हुई थी।
ऐतिहासिक जनादेश: जन सुराज पार्टी के लिए चुनाव मैदान में उतरने के बाद यह पहली और सबसे बड़ी प्रत्यक्ष विधायी जीत मानी जा रही है।
बिहार की राजनीति पर इस नतीजे का असर
36 साल का रिकॉर्ड टूटा: बांकीपुर सीट को बीजेपी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था। नितिन नवीन यहाँ से लगातार 5 बार विधायक रहे थे। इस गढ़ में प्रशांत किशोर की सेंधमारी ने राज्य में बीजेपी के शहरी वोटबैंक में बड़े बदलाव का संकेत दिया है।
तीसरे विकल्प के रूप में उभरी ‘जन सुराज’: इस जीत के साथ जन सुराज ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल एक राजनीतिक प्रयोग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन दोनों के सामने एक मजबूत और सक्षम तीसरा विकल्प बनकर उभरी है।