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सिंधिया-कमलनाथ के बीच ‘पावर जंग’ कांग्रेस में टिकटों का खेल शुरू

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वेब डेस्क। इंदौर से पैंतालीस किमी दूर ग्रामीण विधानसभा की सीट देपालपुर, जहां कांग्रेस चुनाव अभियान समितिके अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ हुंकार भरते हुए कह रहे हैं कि वे आपको खंभा दे रहे हैं, तार दे रहे हैं लेकिन करंट नहीं दे रहे. और खुद पांच लाख के एसी लगाकर सीएम हाउस में सो रहे हैं. सिंधिया के आक्रामक वार और जोशीले अंदाज से पांडाल में बैठी सैकड़ों लोगों की भीड़ उत्साहित होकर सहमति में नारे लगाने लगाती है. लेकिन कांग्रेस का आम कार्यकर्ता असमंजसता में घिर जाता है.

230 से ज्यादा गांव, डेढ़ सौ किमी लंबी और ढाई लाख वोटर्स की इस विधानसभा में कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर मैदान में आ गई है. ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक सत्यनारायण पटेल के शक्ति प्रदर्शन में यह जनसभा करने आए थे और दिलचस्प यह है कि छह दिन बाद ही .अपने समर्थक विशाल पटेल के शक्ति प्रदर्शन के लिए जनसभा करेंगे. यानि सत्यनारायण के साथ सिंधिया हैं तो विशाल के साथ कमलनाथ है. और चंद ही दिनों के फासले में देपालपुर की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता इन दोनों नेताओं को अलग अलग मंच पर दो अलग अलग दावेदारों के साथ देखने वाले हैं.

इधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह संगत में पंगत कर प्रदेश के 35 जिलों में अब तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर गुटबाजी से दूर रहने का संकल्प करवा रहे हैं. और यहां सिंधिया अपने समर्थक के मैदान में आ चुके हैं, तो कमलनाथ अपने खास सिपाहासालार के लिए मैदान पकड़ने वाले हैं. कुल मिलाकर नजारा साफ बिखराव और गुटबाजी का हो गया है.

देपालपुर के कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हैं कि पूरे माहौल ने इस बात को हवा दी है कि सिंधिया और कमलनाथ के बीच टिकटों की लड़ाई अब शुरू हो गई है. कौन अपने समर्थकों को सबसे ज्यादा टिकट दिलवाता है, यह खेल अब शुरू हो गया है. सिंधिया इस तैयारी में लगे हुए हैं कि ज्यादा से ज्यादा टिकट उनके समर्थकों को मिले. पन्ना में उन्होंने खुल कर जिस तरह मुकेश नायक को उम्मीदार घोषित कर जिताने की अपील की उसने कांग्रेस के माहौल में गर्मी ला दी है.

मीडिया इसका जवाब कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से पूछता है और दोनों इस मुद्दे पर चुप्पी साधते हैं. कमलनाथ ने इस पर सफाई दी कि उम्मीदवारों का फैसला स्क्रीनिंग कमेटी करेगी.

डिंडोरी की एक सभा में सिंधिया ने कहा कि आपको शिवराज या सिंधिया में से किसी एक को चुनना है. इसे भी सिंधिया के मुख्यमंत्री बनने के दावे के साथ देखा गया. हालांकि देपालपुर के इस शक्ति प्रदर्शन में उन्होंने न तो अपने समर्थक को प्रत्याशी घोषित किया और न ही ऐसी कोई अपील की. कमलनाथ समर्थक विशाल पटेल न तो सिंधिया के सभा स्थल पर पहुंचे और न ही उनके समर्थक मौजूद रहे.

एक ही सप्ताह में एक ही विधानसभा में सिंधिया-कमलनाथ दोनों की चुनावी सभाओं को लेकर कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ अपना कार्यक्रम पहले ही तय कर चुके थे

कार्यवाहक अध्यक्ष मोतीसिंह के नाम पर यह कार्यक्रम लिया गया था. जब दो कार्यक्रम एक ही ‌विधानसभा में सामने आए तो इसकी जानकारी कमलनाथ और सिंधिया को दे दी गई थी. प्रदेश अध्यक्ष कार्यालय से यह भी कोशिश हुई कि दोनों की नेताओं की मौजूदगी एकसाथ एक मंच पर हो लेकिन यह संभव नहीं हो पाया.

देपालपुर के कार्यकर्ता साफ तौर पर कहते हैं कि दो नेताओं की अलग-अलग मौजूदगी से भाजपा की राह आसान हो जाएगी. यहां का पिछला चुनाव भी कांग्रेस आपसी गुटबाजी के कारण हारी है. और इस बार भी दो खेमे इसमे भारी पड़ने वाले हैं. सिंधिया जिस पर दांव लगा रहे हैं वह सत्यनारायण पटेल दो बार के विधायक हैं और पिछला चुनाव हार चुके हैं. कमलनाथ के खास विशाल पटेल इसी क्षेत्र से पूर्व विधायक जगदीश पटेल के बेटे हैं और पिछले चुनाव से दावेदारी में लगे हैं.

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