बंगाल में ‘मोदी मैजिक’ बनाम ‘ब्रांड ममता’ की लड़ाई, BJP को प्रधानमंत्री की रैलियों से आस

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी के पास स्थानीय चेहरा न होने की बात चुनावी मंच पर जितना भी उठाए, भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और केंद्र सरकार के काम को चुनावी चर्चा में बनाये रखना चाहती है।भाजपा ने मिथुन चक्रवर्ती, शुभेंदु अधिकारी सहित कई प्रभावी स्थानीय नाम होते हुए सधी रणनीति के तहत किसी को मुख्य चुनावी चेहरा नहीं बनाया है। सामूहिक नेतृत्व के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख और केंद्रीय योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने के वादे के साथ तृणमूल को घेरा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हुई पिछली रैली के बाद पार्टी का मनोबल और भी बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री की और भी रैलियां राज्य में होनी है। इसके बाद भाजपा को अपना चुनावी प्रचार पूरी तरह परवान चढ़ने की उम्मीद है। करीब सात मेगा रैली सहित कई रैलियों की योजना पार्टी ने बनाई है।

पीएम मोदी 7 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में रैली के साथ ही ‘मिशन बंगाल’ का आगाज कर चुके हैं। अब 18 मार्च से पीएम मोदी के ‘मिशन बंगाल’ के पार्ट-2 की शुरुआत होगी। इसमें 24 मार्च की रैली बेहद खास बताई जा रही है। इस रैली से पीएम मोदी बंगाल की हॉटसीट नंदीग्राम को भी कवर कर सकते हैं। जमीनी फीडबैक का हवाला देकर भाजपा नेता कह रहे हैं कि ब्रांड ममता पर ब्रांड मोदी भारी पड़ रहा है। इसीलिए प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को पार्टी भुनाने का पूरा प्रयास कर रही है।

भाजपा ममता राज में कुशासन, कमजोर कानून व्यवस्था, विकास न होने,कट मनी जैसे आरोप लगाकर प्रचार कर रही है। बदले में उसके पास नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाएं गिनाने को हैं। आयुष्मान योजना सहित केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने और सोनार बांग्ला के साथ केंद्रीय नेतृत्व की साख के आधार पर लोगों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि बंगाल में भी विकास का मॉडल सामने आएगा। ममता सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप भी भाजपा के लिए बड़ा चुनावी मंत्र है। असम और बंगाल दोनों जगहों पर तुष्टीकरण के आरोप को घुसपैठ से जोड़कर सियासी गठबंधनों का हवाला दिया जा रहा है।

जानकारों का कहना है कि तृणमूल के पास ममता का नाम राज्य के लिए सबसे बड़ा नाम है। लेकिन भाजपा मिथुन को लाने के बाद भी इस बात पर आश्वस्त नही है कि ममता के नाम को मिथुन दा का अकेला चेहरा जवाब दे पाएगा। जानकार मानते हैं कि आज की तारीख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम ऐसा है जो भाजपा को हर चुनाव में थोड़ा बहुत सरप्लस जरूर करता है। लिहाजा बंगाल में भी असोल पोरिवर्तन और सोनार बांग्ला जैसे नारों के शिल्पकार के रूप में सबसे बड़ा चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही है। जानकार मानते हैं कि भाजपा को एकजुट रखने की ताकत हाल में पार्टी में आये किसी नेता के पास नहीं है। लिहाजा पार्टी चुनावी मैदान में किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती।

 

 

 

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