जनता के मन में क्या था तीन राज्यों के नतीजों ने बता दिया
जबलपुर, मुनप्र। हर चुनाव कोई न कोई नया संदेश देकर जाता है। हाल ही में हुए पांच में से तीन हिन्दी भाषी राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जनता ने जिस तरह से कांग्रेस को जनादेश दिया है और जो चुनाव नतीजे आए हैं उससे जनता ने भाजपा को अपने मन की बात सुना दी है। जिससे भाजपा सन्न है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ वह राज्य हैं जिन्होंने केन्द्र में भाजपा की सरकार बनवाने में बड़ा योगदान दिया था और जल्द ही जनता का मोह केन्द्र ओर प्रदेश की भाजपा सरकार से भंग होने लगा। इन राज्यों के किसानों, युवाओं और व्यापारियों के असंतोष को भाजपा दूर नहीं कर सकी। मध्यप्रदेश में किसानों ने बड़ा आंदोलन भी छेड़ा था इसके अलावा दिल्ली में भी देश के किसानों ने धरना प्रदर्शन किया लेकिन न तो केन्द्र सरकार ने उसे गंभीरता से लिया और न ही राज्यों की सरकार ने। इन मुद्दों को गंभीरता से लेने में कहीं न कहीं भाजपा से बड़ी चूक हुई है जिसका खामियाजा उसे तीन राज्यों की सत्ता गवांकर चुकाना पड़ा। भाजपा के लिए गंभीर चिंता का विषय यह है कि जिन राज्यों की मदद से वह सत्ता में आयी थी वे किले अब दरकने लगे हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा का दबदबा रहा और वह पिछले 15 साल से सत्ता में थी। यह सच है कि लगातार चौथा कार्यकाल हासिल करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी लेकिन राजस्थान में तो वसुंधरा राजे सिंधिया की जनता से नाराजगी की खबरें आये दिन सुर्खियों में बनी रहती थीं। इसलिए यहां का चुनाव परिणाम चौंकाता नहीं है। लेकिन छत्तीसगढ़ में भाजपा रमन सिंह के भरोसे उम्मीद लगायी थी लेकिन इस उम्मीद पर भी कांग्रेस ने पानी फेर दिया। मध्यप्रदेश में कांग्रेस भाजपा को बराबर की टक्कर देने मे काबयाब तो रही ही और आज सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गयी है। लंबे समय बाद राज्यों में कांग्रेस को मिली सफलता और चुनाव के नतीजों से एक ओर जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नयी ऊर्जा का संचार हुआ है वहीं भाजपा के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर विपरीत असर पड़ा है। कुछ समय से कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हार रही थी। कांग्रेस अध्यक्ष बनने के ठीक एक साल बाद हासिल हुई यह जीत राहुल गांधी को न केवल कांग्रेस बल्कि विपक्ष के नेता के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। अभी तक तो यह कहा जाता रहा कि जनता उन्हें ठुकरा चुकी है लेकिन चुनावी नतीजों ने स्थिति साफ कर दी। न तो मोदी के द्वारा की जाने वाली मन की बातें जनता पर विश्वास छोड़ पायी और न ही उन्हीं की तर्ज पर शिवराज सिंह दिल से जो बात कर रहे थे वह भी जनता के दिल में नहीं उतर पायी और परिणाम भाजपा के विपरीत चले गए।

