आलोक ओंकार तिवारी की दावेदारी ने बदले समीकरण
जबलपुर। उत्तर मध्य विधान सभा सीट के लिए जहां रोज नए-नए नाम दावेदारी पेश करते नजर आ रहे हैं वहीं इन नामों के बीच एक ऐसा नाम अपनी सशक्त दावेदारी पेश करता नजर आया जिसे राजनीति विरासत में मिली है । यहां बात हो रही है । आलोक ओंकार तिवारी की । जो पूर्व मंत्री स्वर्गीय ओंकार प्रसाद तिवारी के सुपुत्र है। इनकी सशक्त दावेदारी और उत्तर मध्य की जनता का विश्वास बाकी सभी नामों में इन्हें आगे रखता नजर आ रहा है।
सभी वर्गों को साधने का माद्दा
सभी वर्गों का विश्वास भाजपा के इस सशक्त दावेदार को दिखाई देता प्रतीत हो रहा है । चाहे ब्राह्मण वर्ग हो, मुस्लिम वर्ग हूं या फिर जैन, सभी वर्गों को जिस तरह से स्वर्गीय ओंकार महाराज ने अपने कार्यकाल के दौरान साधा था । वही उम्मीद इन वर्गों की आलोक तिवारी से भी की जा रही है और इनका साथ श्री तिवारी को मिलता भी प्रतीत हो रहा। उल्लेखनीय है कि स्व.पं. ओंकार तिवारी का भाजपा से गहरा जुड़ाव रहा है इसके अलावा वे आरएसएस से भी जुड़े रहे ,उनका पूर्व प्रधानमंत्रीे स्व अटल बिहारी वाजपेयी से भी गहरा नाता रहा है । इसी का परिणाम है कि 1999 के सितम्बर माह में भी पंडित तिवारी के निधन के उपरांत 13 सितम्बर 1999 को श्री वाजपेयी संस्कारधानी आए थे और वे स्वर्गीय तिवारी को श्रंद्वाजली देने उनके निवास भी पहुंचे थे।