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आत्महत्या से बची तो बोली, ‘हर मुश्किल का मुकाबला कर बेटे को काबिल बनाऊंगी’

burhanpur 24 06 2018

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बुरहानपुर। नेपानगर में एक माह के दुधमुंहे बच्चे के साथ शनिवार को ट्रेन के सामने लेटकर जान देने की कोशिश करने वाली तबस्सुम पति शेख साजिद (20) अब बेटे का भविष्य संवारने के लिए हर चुनौती और मुश्किलों का सामना कर जीना चाहती है।

पहले भी दो बार आत्महत्या की कोशिश कर चुकी तब्बसुम ने कहा कि पति द्वारा दिए गए एकतरफा तलाक और परिवार वालों की बेरुखी से हताश होकर वह जीवन समाप्त करना चाहती थी। अपनों ने मरने के लिए छोड़ दिया था, लेकिन दुनिया में अच्छे लोग भी हैं जिनकी वजह से मैं आज जिंदा हूं।

शनिवार को नेपानगर रेलवे स्टेशन पर आत्महत्या की कोशिश करने वाली जांबली, तहसील कुंडा हरनामगंज, प्रतापगढ़ (उत्तप्रदेश) निवासी तबस्सुम को बुरहानपुर में वन स्टॉप सेंटर सखी में रखा गया है। यहां काउंसलिंग के बाद वह हताशा और खौफ से उभर चुकी है। काउंसलर नंदा देशपांडे से चर्चा में उसने बताया कि मां की मौत के बाद सौतेली मां आए दिन मारपीट कर परेशान करती थी। एक साल पहले मेरा निकाह मुंबई में शेख साजिद पिता मोहम्मद शाहरुख से करवा दिया। पहली पत्नी को छोड़ कर उसने मुझसे निकाह किया था।

शादी के कुछ समय बाद ही वह प्रताड़ित करने लगा। शराब पीकर मारपीट करता था। गर्भवती होने पर उसने मुझे तीन बार तलाक कहकर घर से निकाल दिया। तनाव और परेशानी की वजह से मैंने बस के आगे कूद कर जान देने की कोशिश तो लोगों ने बचा लिया। इसके बाद दादर में ट्रेन के सामने आत्महत्या की कोशिश को तो रेलवे पुलिस ने मुझे दादर के ऊर्जा नारी निकेतन आश्रम में पहुंचा दिया। गर्भवती होने से कुछ समय बाद डिलेवरी जेजे हॉस्पिटल में करवाई गई। कामधंधे के चलते पिता भी मुंबई में रहता है।

पति और पिता दोनों द्वारा नहीं अपनाने से अस्पताल से सीधे लालगंज, इलाहाबाद नानी के यहां चली गई। उनका व्यवहार भी ठीक नहीं होने से शुक्रवार को काशी एक्सप्रेस में बच्चे को लेकर मुंबई आ रही थी। आगे जीवन कैसे कटेगा इसकी चिंता और तनाव परेशान कर रहा था।

बेटे को देना चाहती थी

ट्रेन के सामने जान देने से पहले वह बेटा लोगों को पालने के लिए देना चाहती थी, ट्रेन के कोच में सवार महिलाओं से उसने पेशकश भी की थी, लेकिन किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया, इसलिए नेपानगर में ट्रेन रुकने पर बेटे को सीने पर रखकर रेलवे ट्रैक पर लेट गई थी। तनाव और जान देने की सनक की वजह से ऊपर से ट्रेन कब गुजर गई पता नहीं चला।

सखी सेंटर में खुश हूं

वन स्टॉप सेंटर में मिली आत्मीयता और समझाइश के बाद अब जीना चाहती हूं। यहां अच्छा लग रहा है, मैं खुश हूं। एक माह के बेटे की अच्छी परवरिश कर उसे काबिल बनाऊंगी। इसके लिए हर मुश्किल और चुनौती का सामना करूंगी। मैं स्कूल तो नहीं गई लेकिन कुरान पढ़ी है, उसमें आत्महत्या को गलत बताया है।

बेटे को दिया रमजान नाम

सखी सेंटर में आई तबस्सुम और उसके बेटे का सेंटर प्रभारी व स्टाफ द्वारा विशेष ख्याल रखा जा रहा है। स्वास्थ्य परीक्षण, भोजन और कपड़ों के अलावा उसे तनाव व दर्द से उबारने का प्रयास किया जा रहा है। सेंटर प्रभारी रेखा भोंडवे ने बताया कि तबस्सुम स्टाफ के साथ घुलमिल गई है। रमजान माह में उसकी डिलेवरी होने से बेटे का नाम रमजान रख दिया है।

नहीं जाना चाहती मुंबई

तबस्सुम वापस मुंबई जाना नहीं चाहती है। उसके पास परिजनों का पता और फोन नंबर भी नहीं है। ऐसे में वन स्टॉप सेंटर में काउंसलिंग के बाद उसे अपर कलेक्टर कार्यालय में पेश किया जाएगा। वहां प्राप्त निर्देशों के अनुसार उसे सुरक्षित जीवन निर्वाह के लिए नारी निकेतन या आश्रम में भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

-रेखा भोंडवे, प्रशासक वन स्टॉप सेंटर बुरहानपुर

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