शासकीय कन्या महाविद्यालय में भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा व्यास पूजा कार्यक्रम आयोजि
कटनी। प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात की अध्यक्षता में शासकीय कन्या महाविद्यालय, कटनी में भारतीय शिक्षण मंडल, जिला इकाई कटनी, महाकौशल प्रांत के तत्वावधान में श्रद्धा एवं गरिमापूर्ण वातावरण में व्यास पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा एवं भारतीय शिक्षण व्यवस्था के गौरवशाली इतिहास से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन, दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ। माँ सरस्वती की वंदना, वंदना सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि श्री दयाशंकर मिश्र, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनील कुमार वाजपेयी, श्री मोहन नागवानी, डॉ. नरेन्द्र बड़खेड़कर, डॉ. दीपक माथुर, डॉ. संध्या खरे, श्री बालमुकुंद एवं श्री आशीष सहित अन्य अतिथियों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने व्यास पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध एवं प्राचीन रही है तथा भारतीय शिक्षा व्यवस्था ने सदैव ज्ञान, संस्कार और चरित्र निर्माण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा अनुसंधान, प्रबंधन, प्रकाशन, प्रशिक्षण एवं संगठन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी। उन्होंने भारत की पराधीनता के दौर में शिक्षा एवं ज्ञान परंपरा पर पड़े प्रभावों का उल्लेख करते हुए भारतीय शिक्षा पद्धति की मूल विशेषताओं को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनील कुमार वाजपेयी ने अपने उद्बोधन में भारतीय शिक्षण मंडल को शिक्षकों के साथ संवाद एवं विचार-विमर्श के माध्यम से भारतीय शिक्षा परंपरा को समझने और आगे बढ़ाने वाला संगठन बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता को प्रथम गुरु माना गया है। उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गुरु-शिष्य संबंधों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण का आधार है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री दयाशंकर मिश्र ने व्यास पूजा की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता बताया। उन्होंने कहा कि गुरु द्वारा प्रदान किए गए ज्ञान को श्रद्धा, एकाग्रता एवं अनुशासन के साथ ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने प्राचीन एवं आधुनिक गुरुकुल परंपरा की तुलना करते हुए बताया कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन, कर्तव्यबोध और चरित्र निर्माण को विशेष महत्व दिया जाता था।
मुख्य वक्ता ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्श उदाहरणों का उल्लेख करते हुए गुरु सांदीपनि एवं भगवान श्रीकृष्ण, गुरु वशिष्ठ एवं भगवान श्रीराम तथा गुरु रामकृष्ण परमहंस एवं स्वामी विवेकानंद के संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन महान गुरु-शिष्य परंपराओं से हमें समर्पण, श्रद्धा, अनुशासन और ज्ञान के प्रति निष्ठा की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. रोशनी पाण्डेय द्वारा आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी मंच संचालन डॉ. श्रद्धा वर्मा ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारीगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। व्यास पूजा कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा एवं गुरु-शिष्य संबंधों के महत्व से परिचित कराते हुए भारतीय शिक्षा व्यवस्था के गौरवशाली मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा प्रदान की।
