Tvisha Sharma Case Bhopal: हाई कोर्ट ने निरस्त की पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत; नवविवाहिता के शरीर पर मिले थे चोटों के 7 निशान
जबलपुर/भोपाल: भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) ने एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और सुबूतों को देखते हुए मृतका की सास और साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट व पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने बुधवार को जारी अपने 17 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि निचली अदालत (जिला कोर्ट) ने जमानत देते समय केस से जुड़े कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया था।
शादी के महज 5 महीने बाद हुई संदिग्ध मौत
यह पूरा मामला भोपाल का है, जहाँ रहने वाली त्विषा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह के साथ हुई थी। लेकिन शादी के महज पांच महीने बाद ही, 12 मई 2026 को ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में त्विषा की मौत हो गई।
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जिला कोर्ट से मिली थी राहत: घटना के दो दिन बाद ही सास गिरिबाला सिंह ने जिला अदालत का रुख किया था, जहाँ 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 15 मई को उनकी उम्र और मृतका को किए गए पैसों के ट्रांसफर को आधार मानकर उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी।
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हाई कोर्ट ने पलटा फैसला: अब हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए साफ किया है कि इस मामले में गहन जांच होना बेहद जरूरी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: फांसी के अलावा शरीर पर थे 6-7 जख्म
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान जो तथ्य सामने आए, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया:
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एंटी-मॉर्टम चोटें: अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि त्विषा के शरीर पर केवल फांसी का फंदा ही नहीं, बल्कि 6 से 7 अन्य गंभीर चोटों के निशान (Anti-Mortem Injuries) भी मिले थे। ये चोटें मृतका के हाथ, उंगली और सिर पर थीं।
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घटनास्थल से छेड़छाड़ का आरोप: बाद की मेडिकल रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि ये चोटें शव को पंखे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान की नहीं हैं। त्विषा के पिता के वकील ने अदालत में गंभीर तर्क देते हुए कहा कि आरोपी सास गिरिबाला सिंह साइबर फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में प्रशिक्षित पूर्व न्यायिक अधिकारी हैं, और उन्होंने अपने इस अनुभव का इस्तेमाल कर साक्ष्यों और घटनास्थल (Crime Scene) से छेड़छाड़ की होगी।
व्हाट्सएप चैट और जबरन गर्भपात से खुला राज
मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता (Advocate General) प्रशांत सिंह ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों ने जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं किया है।
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केवल पति नहीं, सास भी जिम्मेदार: हाई कोर्ट ने व्हाट्सएप चैट (WhatsApp Chats) और मृतका के मायके वालों के बयानों का अध्ययन करने के बाद माना कि दहेज प्रताड़ना और क्रूरता के आरोप केवल पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें सास की भी बराबर की भूमिका नजर आ रही है।
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गर्भपात का दबाव: त्विषा के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह ने त्विषा को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और उन पर गर्भपात (Abortion) कराने का दबाव बनाया। अदालत ने भी माना कि त्विषा का गर्भपात होना एक स्वीकार्य तथ्य है।
हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के बाद अब पुलिस इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है।

