थाई पिंक अमरूद ने इलाहाबादी ‘सुरखा’ को दी चुनौती। कुंभ नगरी प्रयागराज की एक पहचान जहां संगम है तो वहीं दूसरी पहचान लाल रंग का सेब जैसा दिखने वाला इलाहाबादी अमरूद है. इसे सुरखा या एप्पल ग्वावा भी कहा जाता है. ये अमरूद केवल सर्दियों के दिनों में बाजार में आता है लेकिन इस बार बिना सर्दी के भी मानसून के मौसम में एक अमरूद ने प्रयागराज में एंट्री मारी है. ये अमरूद न केवल देखने में काफी आपकर्षक हैं बल्कि इस नए अमरूद को लेकर स्थानीय किसान भी काफी सजग हैं।
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सितंबर के इस उमस भरे मौसम में प्रयागराज शहर ने थाईलैंड के ‘थाई पिंक’ अमरूद ने ऐसी एंट्री मारी है कि इलाहाबादी अमरूद पैदा करने वाले किसान परेशान नजर आने लगे हैं. शहर की सबसे बड़ी मुंडेरा सब्जी मंडी में थाईलैंड के ये अमरूद हर दिन 100 से 150 टन आ रहे हैं. मुंडेरा फल मंडी के अध्यक्ष सतीश कुशवाहा कहते हैं कि इस सीजन में मौसम्मी और सेब का बोलबाला रहता है लेकिन थाई लैंड की एक प्रजाति के अमरूद ने यहां सेब का बाजार पीछे छोड़ दिया है. शहर की सभी फल मंडियों ने इसने कब्जा कर लिया है।
प्रजाति का नाम थाई पिंक वीएनआर
औद्योगिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुसरो बाग के प्रशिक्षण प्रभारी और शोध स्कॉलर वीके सिंह बताते हैं कि बाजार में एंट्री करने वाली अमरूद की इस प्रजाति का नाम थाई पिंक वीएनआर है. यह थाईलैंड की प्रजाति है जिसे रायपुर , पुणे और छत्तीसगढ़ में कुछ किसान पैदा करते हैं. यह देखने में हरा लेकिन अंदर से इसका गूदा लाल होने से लोग इसे इलाहाबादी अमरूद समझ बैठते हैं. फुटकर बाजार में यह सौ से सवा सौ रुपए किलो बिक रहा है
स्थानीय अमरूद किसानों को क्यों सता रहा डर?
अमरूद उत्पादक किसानों की डर की कई वजह है. विगत वर्षों में अमरूद का उत्पादन प्रयागराज क्षेत्र में तेजी से घटा है. इलाहाबादी अमरूद में पहले बिल्ट डिजीज और फिर फ्रूट फ्लाई का हमला हुआ. किसान इससे अमरूद उत्पादन से दूर हटने लगे।
उत्तर प्रदेश कृषि और शोध परिषद ने इलाहाबादी अमरूद की शान वापस लाने के लिए एक परियोजना पर शोध प्रारंभ किया, जिससे किसानों के अमरूद के उपज को बढ़ाया जाए. इसके अंतर्गत अमरूद के पेड़ की एस्पेलियर विधि द्वारा ट्रेनिंग, पेड़ की प्रूनिंग, खाद और बैगिंग तकनीक द्वारा किसानों को समय समय पर ट्रेनिंग दे रहे है , इस शोध के परिणाम जल्द ही दिखेंगे और इलाहाबाद अमरूद पुनः अपनी पुरानी, ग्लोरी को वापस लेगा.
थाई पिंक वीएनआर अमरूद का बाजार में कब्जा
यह अमरूद मूलतः थाईलैंड का है. इसका रंग पकने पर भी हरा ही होता है लेकिन इसका गूदा हल्का गुलाबी से गाढ़ा गुलाबी रंग का होता है, जिससे यह देखने में आकर्षक लगता है. फल गोल और बड़े आकार का होता है. इसके एक अमरूद का वजन सौ से 300 ग्राम के आसपास होता है. स्वाद में मीठा, क्रंची और कम सुगंधित और बीज होते हैं लेकिन बहुत कम. इसका पोषण वैल्यू कम है, लाइकोपीन की मात्रा भी बहुत कम है लेकिन बीटा कैरोटीन की मात्रा अधिक होती है. लगभग हर मौसम में यह तैयार होने की वजह से अमरूद के ऑफ सीजन में यह फल बाजार में कब्जा कर लेता है.
स्वाद सुगंध और पोषण से भरा हुआ है इलाहाबादी अमरूद
इलाहाबादी अमरूद सुरखा, अमरूद की सर्वश्रेष्ठ प्रजाति मानी गई है जो केवल प्रयागराज की फल पट्टी में मिलती है, जिसमें प्रयागराज और कौशाम्बी जिले आते हैं. इलाहाबादी अमरूद की दो उप प्रजातियां हैं. एक है सुरखा या एप्पल ग्वावा जो बाहर से एप्पल की तरह चमकीला सुर्ख लाल और अंदर से सफेद होता है. दूसरा इलाहाबादी सफेदा जो बाहर से हल्का पीला और अंदर से सफेद होता है. इलाहाबादी अमरूद की कोई प्रजाति अंदर से लाल गुदे वाली नहीं होती.
लखनऊ के आसपास से आने वाले ललित और लालिमा प्रजाति के अमरूद, ऊपर से हरे और अंदर से गुलाबी होते हैं. ये अमरूद कुछ-कुछ थाई पिंक की तरह हैं लेकिन इसका स्वाद और सुगंध इलाहाबादी अमरूद से बहुत पीछे हैं. इलाहाबादी अमरूद की सबसे बड़ी खासियत इसकी खुशबू, इसका स्वाद और इसका पोषण वैल्यू है जो किसी प्रजाति में नहीं मिलता.
