कटनी में भूमाफिया का आतंक या पुलिस की चुप्पी? चौकीदार को बांधकर पीटा, बाउंड्री वॉल तोड़ी—कार्रवाई पर उठे सवाल

कटनी में भूमाफिया का आतंक या पुलिस की चुप्पी? चौकीदार को बांधकर पीटा, बाउंड्री वॉल तोड़ी—कार्रवाई पर उठे सवा

कटनी। बरगवां स्थित एलआईसी बिल्डिंग के पास मंगलवार तड़के करीब 4 बजे हुई सनसनीखेज वारदात ने न सिर्फ क्षेत्र में दहशत फैला दी है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, 8–10 नकाबपोश लोगों के साथ पहुंचे एक कथित भू-माफिया ने चौकीदार को बंधक बनाकर बेरहमी से मारपीट की और मौके पर बनी बाउंड्री वॉल को तोड़ दिया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक पुलिस की सक्रियता न के बराबर नजर आ रही है, जिससे पूरे मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

बंधक बनाकर वारदात को दिया अंजाम, लोग सहमे

बताया जा रहा है कि हमलावरों ने पहले चौकीदार को रस्सियों से बांध दिया, ताकि वह किसी प्रकार का विरोध न कर सके। इसके बाद बेखौफ होकर बाउंड्री वॉल को गिरा दिया गया। पूरी घटना के दौरान इलाके में दहशत का माहौल रहा और आसपास के लोग भय के कारण घरों में ही दुबके रहे।

पहले से थी शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

गौरतलब है कि यह मामला नया नहीं है। बरगवां निवासी पैट्रिक डन ने पूर्व में ही एडीएम और तहसीलदार को लिखित शिकायत देकर अवगत कराया था कि उनकी करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन, जो एलआईसी ऑफिस के पीछे स्थित है, पर कुछ असामाजिक तत्व लगातार निर्माण कार्य में बाधा डाल रहे हैं। पीड़ित के अनुसार, यह जमीन खसरा नंबर 209, 210 और 211 में दर्ज है और वह इसके वैध मालिक व कब्जाधारी हैं। सुरक्षा के उद्देश्य से उन्होंने बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया था, लेकिन आरोप है कि कुछ लोग लगातार मजदूरों को धमका रहे थे, काम बंद कराने का दबाव बना रहे थे और पैसे की मांग कर रहे थे। रकम न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही थी।
इसके बावजूद, शिकायत के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होना अब पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिरकार, वही आशंका सच साबित हुई और बाउंड्री वॉल को तोड़ दिया गया।

जांच के नाम पर औपचारिकता?

माधवनगर थाना प्रभारी संजय दुबे का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती, तो इतनी बड़ी घटना को रोका जा सकता था।

अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, क्षेत्र में दहशत के साथ-साथ आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

Exit mobile version