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मणिकर्णिका कल्चरल एवं वेलफेयर सोसायटी भोपाल द्वारा प्रस्तुत नाटक “भोलाराम” का सफल मंचन

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मणिकर्णिका कल्चरल एवं वेलफेयर सोसायटी भोपाल द्वारा प्रस्तुत नाटक “भोलाराम” का सफल मंच

कटनी- मणिकर्णिका कल्चरल एवं वेलफेयर सोसायटी, भोपाल द्वारा प्रस्तुत नाटक “भोलाराम” का सफल मंचन संप्रेषणा नाट्य गृह, कटनी में सायं 7 बजे किया गया। यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें अतिथियों के रूप में अरविंद तिवारी,अंकिता तिवारी,योगेश तिवारी,सतीश जायसवाल, भागचंद रजक एवं बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति रही। नाटक के लेखक बिशना चौहान एवं संगीत गणेश माथुर का रहा, वाद्य में राकेश ,जबकि निर्देशन गुंजन मालवीय एवं शिखा चौहान द्वारा किया गया। परिकल्पना सतीश अहिरवार एवं अनुज मिश्रा की रही, जिनकी सृजनात्मक सोच और मंचीय प्रस्तुति ने नाटक को प्रभावशाली बनाया।
“भोलाराम” एक सरल, हास्यप्रधान एवं आध्यात्मिक कथा है, जो एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताती है जिसे भोजन अत्यंत प्रिय है और जो जीवन में कोई कार्य नहीं करता। परिस्थितियोंवश वह एक आश्रम में पहुँचता है, जहाँ नियम, अनुशासन और भक्ति के माध्यम से उसका जीवन बदलने लगता है।
एकादशी के प्रसंग में, जब भोलाराम को भोजन नहीं मिलता, तब उसकी सरल भक्ति के कारण स्वयं भगवान श्रीराम अपने परिवार सहित उसके सामने प्रकट होते हैं। अंततः यह कथा यह संदेश देती है कि ज्ञान, तप और विद्वता से अधिक महत्वपूर्ण ‘सरलता’ है, क्योंकि भगवान केवल उसी के हृदय में निवास करते हैं जो निष्कपट और सरल होता है।
कथा का मुख्य सार भगवान को पाने के लिए बड़े ज्ञान या कर्मकांड नहीं, बल्कि सच्ची सरलता और निष्कपट भक्ति ही सबसे बड़ा माध्यम है।” मंच पर भोलाराम की भूमिका में ऋषि परौहा ने अपने सहज हास्य और मासूम अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। गुरुजी के रूप में उदय प्रताप सिंह ने गंभीर और प्रभावशाली अभिनय प्रस्तुत किया। भगवान राम की भूमिका में आकाश तिवारी ने गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं सीता के रूप में शिवानी अहिरवार ने कोमल और भावपूर्ण अभिनय से सराहना बटोरी। अन्य कलाकारों में के.एल. राव, आदित्य गोस्वामी, अनुज मिश्रा, सतीश अहिरवार, मोहित साहू, दिवांशु जायसवाल, शिवा रजक, शिवम रजक, खुशी शाक्या, हर्ष श्रीवास्तव, वान्या मालवीय, आशुतोष गुप्ता, हार्दिक गुप्ता, कार्तिक गुप्ता, आयुष, लक्ष्य, डॉली,महक,आदि गुप्ता शामिल रहे। मंच परे सहयोग रेनू श्रीवास्तव, पूनम सोनवाने, शगुन चौहान, सुनीता वर्मा एवं श्यामा चौहान का रहा। नाटक ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि सरलता और भक्ति का गहरा संदेश भी दिया।

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