दुनिया में मंदी की आहट, लेकिन भारत में तेजी! जापान और सिंगापुर से बरसा धन, जानिए RBI रिपोर्ट की मुख्य बातें
दुनिया में मंदी की आहट, लेकिन भारत में तेजी! जापान और सिंगापुर से बरसा धन, जानिए RBI रिपोर्ट की मुख्य बातें
दुनिया में मंदी की आहट, लेकिन भारत में तेजी! जापान और सिंगापुर से बरसा धन, जानिए RBI रिपोर्ट की मुख्य बातें
मुंबई: वैश्विक अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर भारी दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी जुलाई बुलेटिन में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि हाल के महीनों में विदेशी निवेश में सुधार से भारत के प्रति वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
हालाँकि, केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि लेख में व्यक्त विचार उसके लेखकों के निजी हैं, इसे RBI का आधिकारिक दृष्टिकोण न माना जाए।
विदेशी निवेश में उछाल: FPI और FDI के मजबूत आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के बाह्य क्षेत्र (External Sector) से जुड़े जोखिम संकेतक मजबूत बने हुए हैं:
FPI निवेश: बॉन्ड बाजार को नीतिगत समर्थन और वैश्विक तनाव में कमी के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जुलाई में (20 जुलाई तक) $3.1 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश (इक्विटी और बॉन्ड) किया।
FDI का जोर: अप्रैल-मई 2026 के दौरान एफडीआई (FDI) प्रवाह बढ़ा। कुल इक्विटी निवेश का 74 प्रतिशत हिस्सा जापान, सिंगापुर और मॉरीशस से प्राप्त हुआ।
प्रमुख सेक्टर्स: वित्तीय सेवाएं, विनिर्माण (Manufacturing), खुदरा-थोक व्यापार और कंप्यूटर सेवाओं में कुल निवेश का लगभग 80% हिस्सा आया।
कृषि, व्यापार और महंगाई की स्थिति
खाद्यान्न भंडार और मानसून: दक्षिण-पश्चिम मानसून का वितरण असमान रहने के बावजूद, देश का पर्याप्त खाद्यान्न भंडार खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद करेगा। दुनिया में मंदी की आहट, लेकिन भारत में तेजी! जापान और सिंगापुर से बरसा धन, जानिए RBI रिपोर्ट की मुख्य बातें
व्यापार समझौते: वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में आयात-निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत-ब्रिटेन (India-UK) व्यापार समझौते और अन्य द्विपक्षीय संधियों से विदेशी व्यापार को और मजबूती मिलेगी।
खुदरा महंगाई (CPI): जून 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 18 महीने के उच्च स्तर 4.4 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई में 3.9% थी। खाद्य पदार्थों और ईंधन के महंगे होने से यह उछाल देखा गया।