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Shiksha Niti Rulse Update For PhD : कॉलेज में पढ़ाने वाले प्रोफेसर ही कर सकेंगे पीएचडी

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Shiksha Niti Rulse Update For PhD : कॉलेज में पढ़ाने वाले प्रोफेसर ही कर सकेंगे पीएचडी । पीएचडी को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सालभर में कई नियमों में बदलाव किया है। अब पीएचडी गाइड वहीं शिक्षक बन सकेंगे, जो स्नातकोत्तर की कक्षाएं विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। यह नियम नवंबर-2022 में संशोधित हुआ है। उसके आधार पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने डाक्टरल एंट्रेंस टेस्ट (डीईटी) करवाने से पहले पंजीयन किए है। इस वजह से कई शिक्षक सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं। डीईटी के लिए 250 गाइड बनाए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, नए नियम को 2023-24 सत्र से लागू किया जा रहा है।

इंटरव्यू में भी क्वालिफाइ करना अनिवार्य

 

देशभर के शैक्षणिक संस्थानों से होने वाले शोध कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यूजीसी समय-समय पर नियमों में संशोधन करता आया है। पिछले साल से डीईटी पास करने के अलावा कोर्स वर्क के बाद होने वाले रिसर्च एडवाइजरी कमेटी (आरएसी) के इंटरव्यू में भी क्वालिफाइ करना अनिवार्य है। उसके आधार पर उम्मीदवारों को कोर्स वर्क करना होगा। बाद में पीएचडी के लिए गाइड आवंटित होंगे।

गाइड को लेकर पंजीयन नियम भी सख्त

कर दिया है। पहले जहां पीएचडी करने के पांच साल बाद शिक्षक गाइड के लिए पात्र रहता था, जिसमें स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की कक्षाएं लेते थे। मगर अब गाइड सिर्फ उन्हीं लोगों को बनाया जाएगा, जो एमए, एमकाम, एमएससी, एमबीए सहित अन्य पीजी कोर्स पढ़ाते हैं। नियम में संशोधन के पीछे असल वजह यह है कि पीएचडी की गुणवत्ता गिरने लगी है।

समाज को लेकर भी कोई योगदान

यहां तक कि शोध कार्यों का समाज को लेकर भी कोई योगदान है। इसके चलते स्नातक पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले कई शिक्षक गाइड की सूची से बाहर होंगे। शैक्षणिक विभाग के सहायक कुलसचिव अनुराग त्रिवेदी ने कहा कि यूजीसी ने नियमों में नवंबर-2022 में संशोधन किया है। उसको विश्वविद्यालय ने भी अपना लिया है।

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