शहडोल: विदाई की रस्म में नाचते-नाचते पिता की मौत; एक साथ उठी पत्नी की डोली और पिता की अर्थी
शहडोल (गोहपारू): विदाई की रस्म में नाचते-नाचते पिता की मौत; एक साथ उठी पत्नी की डोली और पिता की अर्थी। जिले के ग्राम पैलवाह में एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसे देख पत्थर दिल भी पसीज जाए। जिस घर से बेटी की डोली उठनी थी और जहाँ से दूल्हा अपनी दुल्हन को विदा कराकर ले जाने वाला था, वहां से एक साथ डोली और अर्थी निकली। खुशियों भरे माहौल में दूल्हे के पिता की अचानक मौत ने पूरे जश्न को मातम में बदल दिया।
विदाई की रस्म में नाचते-नाचते पिता की मौत; एक साथ उठी पत्नी की डोली और पिता की अर्थी
जश्न के बीच काल का क्रूर प्रहार
घटना गोहपारू थाना क्षेत्र के ग्राम पैलवाह की है। जयसिंहनगर के ग्राम गजनी से धरमदास परस्ते (50) अपने बेटे हरीश सिंह की बारात लेकर आए थे। रात भर शादी की रस्में हंसी-खुशी संपन्न हुईं। सुबह विदाई की तैयारी चल रही थी और आदिवासी परंपरा के अनुसार ‘हल्दी-पानी’ की रस्म निभाई जा रही थी। बाराती और घराती नाच-गा रहे थे, दूल्हे के पिता धरमदास भी खुशी में थिरक रहे थे कि अचानक वे अचेत होकर गिर पड़े।
अस्पताल ले जाते ही खुशियां मातम में बदलीं
परिजन उन्हें तुरंत गोहपारू अस्पताल लेकर भागे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जैसे ही मौत की खबर घर पहुंची, चीख-पुकार मच गई। दुल्हन की विदाई की तैयारी कर रहे लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
भारी मन से विदा हुई दुल्हन, ससुर के शव के साथ पहुंची ससुराल
दूल्हा हरीश इस असमंजस में था कि वह पिता का शव संभाले या पत्नी की डोली ले जाए। ग्रामीणों और बुजुर्गों ने ढांढस बंधाया, जिसके बाद एक ही वाहन से पिता के शव और नई नवेली दुल्हन को लेकर दूल्हा अपने गांव गजनी के लिए रवाना हुआ।
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गमगीन विदाई: दुल्हन रीना सिंह अपनी ससुराल की दहलीज पर खुशी-खुशी कदम रखने के बजाय ससुर के शव के साथ रोते हुए पहुंची।
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शोक की लहर: इस घटना ने न केवल दोनों परिवारों को तोड़ दिया, बल्कि पैलवाह और गजनी दोनों गांवों में मातम छा गया।

