इस चौपाई में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि वर्षा ऋतु बीत चुकी है और अत्यंत सुंदर शरद ऋतु आ गई है। चारों तरफ फूले हुए कास (एक प्रकार की घास) के सफेद फूल खिलने से पृथ्वी ऐसी प्रतीत हो रही है, मानो वर्षा ऋतु ने अपने सफेद बालों (कास के फूलों) के रूप में अपना बुढ़ापा प्रकट कर दिया हो।
कटनी(YASHBHARAT.COM)। गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस में चौपाई में वर्षा ऋतु का वर्णन करते हुए लिखा है ‘फूले कास सकल मही छाई, जनु बरसा कृत प्रकट बुढ़ाई’ अर्थात कास नामक घास में फूल आ जाने पर वर्षा ऋतु का बुढ़ापा आने लगता है। अर्थात मानसून के समापन की बेला आ जाती है। चौपाई में वर्णन यह है सकल महि छाई अर्थात चहुं ओर कास फूलने पर वर्षा बूढ़ी होने के संकेत मिलते हैं। वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु आने वाली है। प्रकृति से इसके संकेत मिलने लगे हैं। खेतों में घास फूलने लगे है। भारतीय संस्कृति में कास में फूल आने को मानसून की विदाई का संकेत मानती है। इसका जिक्र ग्रंथों में भी है। इस संबंध में वरिष्ठ नागरिक राम नारायण ने कहा कि कास में फूल को देखकर ही हमारे पूर्वज वर्षा ऋतु की विदाई मान लेते थे और आनेवाली ठंड से निबटने की तैयारी शुरू कर देते थे। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी तक कास नामक घास में फूल आ जाते है तब यह माना जाता था कि अब बारिश बूढ़ी हो गई है। जिसका अर्थ यह है कि कांस नामक घास में फॅूल आ जाते हेैं तो बारिश बूढ़ी होना प्रतीत हो जाता है। इसी के साथ बारिश के बंद होने के संकेत मिलने लगते हैं। लेकिन अभी कांस कहीं कहीं ही फूले है इससे यह लग रहा है कि अभी बारिश पूरी नहीं हुई है। आने वाले दिनों में अभी बारिश जारी रहना है।