सोमवती अमावस्या पर महिलाओं ने लगाई तुलसी की 108 बार परिक्रमा
कटनी। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। हिदू धर्म में इस अमावस्या का विशेष महत्व है। पुराणों में कहा गया है कि इस दिन सुहागिनों को पति की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सहस्त्र गोदान का फल प्राप्त होता है। सोमवार चूंकि भगवान शिव को समर्पित है इसलिए इस दिन भोलेनाथ की पूजा करते हुए महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना करती हैं और पीपल के वृक्ष में शिवजी का वास मानकर उसकी पूजा और परिक्रमा की जाती है। यह भी माना जाता है कि पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए अमावस्या के सभी दिन श्राद्ध की रस्मों को करने के लिए उपयुक्त हैं। कालसर्प दोष निवारण की पूजा करने के लिए भी अमावस्या का दिन उपयुक्त होता है। वैसे तो इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है लेकिन यदि यह संभव नहीं हो तो नहाते समय पानी में गंगा जल मिलाया जा सकता है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। पीपल की पूजा के बाद गरीबों को कुछ दान अवश्य देना चाहिए। यदि कोई नदी या सरोवर निकट हो तो वहा अवश्य जाएं और भगवान शंकर, पार्वती और तुलसी जी की भक्तिभाव से पूजा करें। सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी की परिक्रमा करना, ओंकार का जप करना, सूर्य नारायण को अर्घ्य देना अत्यंत फलदायी है। मान्यता है कि सिर्फ तुलसी जी की 108 बार प्रदक्षिणा करने से घर की दरिद्रता भाग जाती है।
प्रत्येक मास एक अमावस्या आती है, परंतु ऐसा बहुत ही कम होता है, जब अमावस्या सोमवार के दिन हो। यह स्नान, दान के लिए शुभ और सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। पुराणों में कहा गया है कि सोमवार को अमावस्या बड़े भाग्य से ही पड़ती है। इस दिन को नदियों, तीर्थों में स्नान, गोदान, अन्नदान, ब्राह्माण भोजन, वस्त्र आदि दान के लिए विशेष माना जाता है। सोमवार चंद्रमा का दिन है। इस दिन अमावस्या को सूर्य तथा चंद्र एक सीध में स्थित जब सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं।